जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों पर शनिवार शाम गणगौर महोत्सव 2026 की शाही सवारी ने ऐसा रंग जमाया कि पूरा शहर लोक संस्कृति, आस्था और सांस्कृतिक वैभव में डूबा नजर आया।
जयपुर के सिटी पैलेस परिसर से सायं 5:45 बजे रवाना हुई शाही सवारी जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे जनसैलाब उमड़ता गया और गुलाबी नगरी में गणगौर उत्सव जीवंत हो गया।
नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर तान और ‘गौर माता की जय’ के जयकारों के बीच सजी-धजी पालकियों में विराजी गणगौर माता के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। त्रिपोलिया गेट से लेकर छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक सवारी के मार्ग पर छतों, बालकनियों और सड़कों पर खड़े लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
गणगौर माता की सवारी निकलते समय अद्धभुत झलकियों को देखकर जयपुरवासी मंत्रमुग्ध हो गये। उत्साहित दर्शक मोबाइल कैमरों में फोटो खींचते और वीडियो बनाते हुए नजर आये। जयपुर वीडियो के साथ ही देसी-विदेशी पर्यटक भी इस अद्वितीय सांस्कृतिक आयोजन को कैमरों में कैद करते नजर आए।
शोभायात्रा में शामिल 210 लोक कलाकारों ने आयोजन को जीवंत बना दिया और कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया, चरी और घूमर जैसे लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया वहीं रावणहत्था, भपंग और शहनाई की धुनों ने पूरे वातावरण को सुरमयी बना दिया।
इस बार 32 पारंपरिक लवाजमों की भव्य मौजूदगी ने सवारी को और भी आकर्षक बना दिया। सुसज्जित हाथी, ऊंट दल, घोड़े, विक्टोरिया कैरिज और विभिन्न बैंडों की धुनों के बीच पहली बार शामिल शंकर बैंड ने खास आकर्षण पैदा किया।
सवारी के गणगौरी बाजार पहुंचते ही पूरा इलाका मानो लोक उत्सव के चरम पर नजर आया। महोत्सव का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका लाइव प्रसारण भी रहा, जिसके माध्यम से देश-विदेश में बसे राजस्थानियों ने इस भव्य आयोजन को रियल टाइम में देखा। अब रविवार को बूढ़ी गणगौर की शाही सवारी के साथ यह महोत्सव अपने अंतिम चरण में प्रवेश करेगा।
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार बूढ़ी गणगौर की सवारी शाम 5:45 बजे सिटी पैलेस से रवाना होकर पारंपरिक मार्ग त्रिपोलिया गेट, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार से गुजरते हुए तालकटोरा, ड्रिक पार्क तक पहुंचेगी।
शाहपुरा में मनाया गणगौर महोत्सव
जयपुर जिले के ऐतिहासिक शाहपुरा में शनिवार को रावल मोटी महल परिसर में आयोजित गणगौर महोत्सव पूरे हर्षोल्लास, श्रद्धा और सांस्कृतिक वैभव के साथ मनाया गया। यह आयोजन रानी रत्ना कुमारी फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा राजस्थान पर्यटन विभाग के सहयोग से किया गया, जिसमें विभिन्न पर्यटन एवं आतिथ्य संगठनों का सहयोग रहा। इसमें स्पेन, इंग्लैंड एवं फ्रांस सहित विभिन्न देशों से आये विदेशी पर्यटकों ने भी भाग लिया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में डाइकिन एसी इंडिया प्रालि के क्षेत्रीय प्रमुख अरुण वधावन शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक गणगौर शोभायात्रा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, घुड़सवारी प्रदर्शन एवं पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। कौशल विकास के क्षेत्र में आरआरकेएफ एवं डाइकिन के बीच हुए एमओयू को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया, जिसके तहत युवाओं को प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर प्रदान किये जाएंगे। महोत्सव के अंतर्गत रानी रत्ना कुमारी फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित ‘सशक्तिकरण अभियान’ को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया, जिसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को प्रोत्साहित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
इस पहल के तहत छाबड़ी एवं टोकरी निर्माण, मिट्टी के बर्तन, लोहे के उपकरण, जूतियां एवं मोजड़ी, मनियारी सामान तथा लाख की चूड़ियों जैसे पारंपरिक हुनरों को मंच प्रदान किया गया। महोत्सव में इन कारीगरों के कार्यों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए विशेष स्टॉल लगाये गये, जिससे उन्हें न केवल पहचान मिली बल्कि रोजगार के नये अवसर भी प्राप्त हुए।
यह पहल ‘स्थानीय खरीदें, कारीगरों को आगे बढ़ाएं’ के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है और पारंपरिक कला को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय कारीगरों को मंच प्रदान करते हुए ‘हुनर से रोज़गार’ की अवधारणा को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया गया।





