अजमेर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां देशभर में राष्ट्रभक्ति और उत्साह का वातावरण रहा, वहीं संत निरंकारी मिशन की ओर से अजमेर में ‘मुक्ति पर्व’ श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। चामुंडा चौराहा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन परिसर में आयोजित विशाल सत्संग में ब्रह्मज्ञान के माध्यम से आंतरिक स्वतंत्रता, मानव एकता, प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया गया।
सत्संग में ज्ञान प्रचारक शांती चंदनानी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्ची मुक्ति केवल बाहरी बंधनों से स्वतंत्र होने में नहीं, बल्कि नफरत, अहंकार, संकीर्ण सोच और पूर्वाग्रहों से मुक्त होने में है। हर सांस में निराकार परमात्मा का अनुभव करते हुए प्रेम, भक्ति, स्वीकार्यता और मानवता के साथ जीवन जीना ही वास्तविक मुक्ति है।
संत निरंकारी मंडल अजमेर के इंचार्ज सुशील टांक ने बताया कि ‘मुक्ति पर्व’ का शुभारंभ वर्ष 1964 में जगत माता बुद्धवंती जी की पावन स्मृति में हुआ था। वर्ष 1969 में शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के बाद यह दिवस ‘शहनशाह जगतमाता दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा। वर्ष 1979 में संत निरंकारी मंडल के प्रथम प्रधान संत लाभ सिंह जी की स्मृति को भी इससे जोड़ा गया और बाबा गुरबचन सिंह जी ने इसे ‘मुक्ति पर्व’ के रूप में स्थापित किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से युगनिर्माता माता सविंदर जी को भी इस अवसर पर श्रद्धापूर्वक नमन किया जाता है। उनके वात्सल्य, विनम्रता, त्याग और निःस्वार्थ सेवा से परिपूर्ण जीवन को श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बताया गया। इस अवसर पर मिशन एवं मानवता की सेवा में अपना तन-मन समर्पित करने वाले भक्तों और सेवादारों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की गई।
सत्संग में वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार भौतिक स्वतंत्रता राष्ट्र की प्रगति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है, उसी प्रकार ब्रह्मज्ञान की दिव्य ज्योति मनुष्य को उसकी वास्तविक पहचान का बोध कराती है। आत्मबोध और परमात्मबोध के माध्यम से व्यक्ति भेदभाव, अहंकार और अज्ञान से ऊपर उठकर प्रेम, सदभाव और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। मुक्ति पर्व का आयोजन संत निरंकारी मिशन के विभिन्न सत्संग केंद्रों पर भी श्रद्धा और समर्पण के साथ किया गया।



