दिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद-शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, हाई कोर्ट ने तीसरी बार ठुकराई याचिका

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नई दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने बुधवार को दोनों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज है। हाई कोर्ट में दोनों की जमानत याचिका खारिज होने का यह तीसरा मौका है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने दोनों की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से जनवरी 2026 में दिए गए निर्देशों में हाई कोर्ट बदलाव नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह न्यायिक अनुशासन के सिद्धांत से बंधी हुई है। The Indian Express
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को इसी मामले में कई सह-आरोपियों को जमानत दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने दोनों को नए सिरे से जमानत मांगने के लिए कुछ शर्तों के अधीन अवसर दिया था। इनमें संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने अथवा आदेश के एक वर्ष बाद—जो भी पहले हो—जमानत के लिए दोबारा अदालत का रुख करने की व्यवस्था शामिल थी।

सह-आरोपियों से अलग मानी गई भूमिका

सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के फैसले में अभियोजन की ओर से उमर खालिद और शरजील इमाम पर लगाई गई भूमिका को अन्य सह-आरोपियों से अलग माना गया था। फैसले में दोनों को कथित साजिश में केंद्रीय भूमिका और उसके कथित वैचारिक सूत्रधार के रूप में आरोपित किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, ये अभियोजन के आरोप हैं और मुकदमे में दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।

खालिद और इमाम ने बदली हुई परिस्थितियों और अन्य मामलों में आए न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए फिर से जमानत मांगी थी। इससे पहले निचली अदालत ने 4 जुलाई को उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसके खिलाफ दोनों दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे थे। हाई कोर्ट ने अब निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ी कथित बड़ी साजिश का है। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश थी और इसमें दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। बचाव पक्ष इन आरोपों का विरोध करता रहा है और लंबी हिरासत सहित विभिन्न आधारों पर जमानत की मांग करता रहा है।