प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी पर कोई असर नहीं पड़ेगा

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नई दिल्ली। तेल कंपनियों की ओर से प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि इस बढ़ोतरी का आम आदमी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि यह बढ़ोतरी केवल प्रीमियम श्रेणी में हुई है, और यह हर दिन बिकने वाले कुल पेट्रोल का मुश्किल से 2–4 प्रतिशत ही है। गौरतलब है कि प्रीमियम पेट्रोल को हाई-ऑक्टेन या परफॉर्मेंस फ्यूल कहा जाता है। यह इंजन की कार्यक्षमता को बढ़ाने और बेहतर माइलेज देने का काम करता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से लग्ज़री, स्पोर्ट्स और अन्य हाई-परफॉर्मेंस वाहनों में किया जाता है।

सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने अपने प्रीमियम-ग्रेड पेट्रोल की कीमत में दो रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, और नई दरें शुक्रवार से लागू हो गई हैं। कंपनी ने हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बदलाव का कोई कारण नहीं बताया है, लेकिन उद्योग के जानकारों का मानना है कि यह वैश्विक कच्चे तेल के बाज़ारों में उतार-चढ़ाव और ईरान तथा अमेरिका के बीच तनाव के चलते लॉजिस्टिक्स लागत में हो रहे बदलावों से जुड़ा हो सकता है।

इससे पहले एचसीएल ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि कच्चे तेल की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं है। अतिरिक्त कार्गो पहले ही रास्ते में हैं और आने वाले दिनों में भारत की आपूर्ति स्थिति को और मज़बूत करेंगे। अफ़वाहों से बचें। आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें।

इस मुद्दे पर बात करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि प्रीमियम पेट्रोल की नई कीमतें 20 मार्च 2026 से लागू होंगी, और यह भी साफ़ किया कि इस बढ़ोतरी का आम ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वैसे तो सभी चीज़ें हम पर असर डालती हैं और आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। पेट्रोल के मामले में कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। सिर्फ़ प्रीमियम श्रेणी में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, और वह भी रोज़ बिकने वाले कुल पेट्रोल का मुश्किल से 2–3 प्रतिशत या चार प्रतिशत ही है।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि आम आदमी के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ाई गई हैं। हम ईरान से तेल लें या न लें, यह सिर्फ़ पेट्रोल के लिए है। पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें अब बाज़ार के हिसाब से तय होती हैं। इसका फ़ैसला तेल कंपनियाँ करती हैं। वर्ष 2014 से पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बाज़ार के हिसाब से तय होती हैं। सरकार इन्हें नियंत्रित नहीं करती। उन्होंने कहा कि ग्राहकों के लिए, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जेट फ़्यूल की कीमतें भी बाज़ार के हिसाब से ही तय होती हैं।