पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के युवक ने प्यार के लिए पार की नियंत्रण रेखा

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श्रीनगर। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से अवैध रूप से सीमा पार करने का मामला जो शुरू में एक सामान्य घुसपैठ जैसा लग रहा था, वह आखिरकार प्रेम की एक अनूठी कहानी में बदल गया। शनिवार दोपहर को इस कहानी का अंत एक भावुक विदाई के साथ तब हुआ जब दुनिया की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली सीमाओं में से एक को पार करके यहां आए 22 साल के युवक जीशान मीर को वापस भेज दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार पीओके के फॉरवर्ड कहूता के पनकेडी गांव के निवासी जीशान को सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उड़ी में कमान क्रॉसिंग के माध्यम से सकुशल रवानगी कर दी गई।

गौरतलब है कि जीशान को 31 मई को भारतीय क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके खिलाफ संबंधित कानूनों और विदेशी नागरिक अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर उड़ी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) की अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया। अदालत ने अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को बंद करते हुए उसे जेल की सलाखों से आजाद कर दिया।

अदालत के आदेश और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, अधिकारियों ने शुक्रवार को कमान क्रॉसिंग के जरिए उसे वापसी की राह दिखाई। जांचकर्ताओं ने कहा कि यह घटना किसी पारंपरिक घुसपैठ की कोशिश जैसी नहीं थी।

अधिकारियों के अनुसार जीशान ने उरी क्षेत्र में नियंत्रण रेखा को किसी आतंकवादी या आपराधिक इरादे से नहीं, बल्कि कश्मीर घाटी में रहने वाली अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए पार किया था। जीशान को नियंत्रण रेखा पर बसे गांव सिलीकोट के पास भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने के तुरंत बाद रोक लिया गया था।

सिलीकोट में पूछताछ के दौरान उसने सेना को बताया कि वह अपनी एक दूर की रिश्तेदार, 22 वर्षीय इरम बानो से मिलने आया था, जिसके साथ वह पिछले एक साल से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में था। उनकी ऑनलाइन दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम में बदल गई। उसका प्रेम उनके बीच की दूरी और एक संवेदनशील सीमा के फासले के बावजूद बना रहा।

पीओके की पहाड़ी ढलानों पर पाकिस्तानी सेना की चौकियों से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर बसे थजाल गांव की निवासी इरम ने बताया कि वे सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार संपर्क में थे। जीशान ने अक्सर कानूनी रूप से मिलने आने की बात कही थी। उसने कहा कि उसने मुझसे कहा था कि वह वीज़ा पर आएगा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह इतना खतरनाक रास्ता चुनेगा।

31 मई की सुबह जब जीशान ने नियंत्रण रेखा पार की, तो वह सिलीकोट से उसे एक संदेश भेजने में सफल रहा। इसके बाद जो हुआ वह किसी फिल्मी दृश्य जैसा था। इरम ने याद करते हुए बताया कि जब मुझे सुबह उसका संदेश मिला, तो मैं खिड़की से कूदकर सिलीकोट की ओर भागी। जब तक मैं गांव के पास के गेट पर पहुंची, मैंने उसे देख लिया था। वह सेना के जवानों को सब कुछ बता चुका था और मैंने भी उसकी कहानी की पुष्टि की। मैं रो पड़ी।

वह पल बहुत छोटा था। जल्द ही, अधिकारियों ने उनके परिवार भी वहां बुला लिया। उसी दिन उसके परिवार को इस जज्बाती रिश्ते के बारे में पता चला। दोनों का सच्चा प्रेम देख कर सैनिकों ने दोनों को कुछ मिनटों के लिए साथ रहने की इजाजत दे दी।

जीशान के लिए यह यात्रा बिल्कुल भी आसान नहीं थी। केवल चप्पल पहने, अपना मोबाइल फोन और पहचान पत्र लेकर उसने बेहद कठिन रास्तों को पार किया था। एक स्थान पर तो उसका सामना एक तेंदुए से भी हुआ था।

इरम ने कहा कि उसने बाद में मुझे बताया कि रास्ते में उसने एक तेंदुआ देखा था। लेकिन, तेंदुए के मुंह में पहले से ही कोई शिकार था और वह दूर चला गया। वरना, कुछ भी हो सकता था। खतरों के बावजूद जीशान आगे बढ़ता रहा, क्योंकि वह पारिवारिक दबाव में किसी अन्य जगह तय होने वाली शादी से पहले अपनी प्रेमिका से मिलना चाहता था।

प्रेमिका इरम से मिलने की जीशान की हिम्मत और हसरत ने उसे लगभग ऐसी जगह भेज दिया था जहां वह पूरी जिंदगी तहखाने में ही बिता देता लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वह अपनी हिरासत के करीब एक महीने बाद आज उसे वापस भेज दिया गया।