दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला पीजी भवन ढहने से 3 की मौत, कई घायल

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नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बेसमेंट समेत पांच मंजिला एक पुरानी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के बीच बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है।

यह इमारत पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही थी और इसमें कॉलेज के छात्र रहते थे। एम्स ट्रॉमा सेंटर के अनुसार हादसे के बाद सात लोगों को अस्पताल लाया गया, जिनमें तीन को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। एक घायल को उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल भेजा गया।

40 से 50 लोगों के मौजूद होने का अनुमान

हादसे के समय इमारत में कितने लोग थे, इसे लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों ने मलबे में 15 से अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका जताई है। वहीं मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी के शुरुआती आकलन के मुताबिक हादसे के वक्त भवन में करीब 40 से 50 लोग मौजूद हो सकते थे।

पुलिस के अनुसार अब तक छह लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा चुका है। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

आठ दमकल गाड़ियां और 17 एंबुलेंस मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और दिल्ली अग्निशमन सेवा की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान में एनडीआरएफ, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और कैट्स की टीमें भी शामिल हैं। मौके पर आठ दमकल गाड़ियां और 17 एंबुलेंस तैनात की गई हैं।

पुलिस के मुताबिक दक्षिण कैंपस थाने को दोपहर करीब 1 बजकर 34 मिनट पर सत्य निकेतन मार्केट में इमारत गिरने की सूचना मिली थी। इसके बाद विभिन्न एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया।

40-50 साल पुरानी थी इमारत

प्रारंभिक पुलिस जांच में सामने आया है कि ढही हुई इमारत करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी थी। बेसमेंट के अलावा इसमें पांच मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पेइंग गेस्ट आवास के तौर पर किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत गिरने के पीछे वास्तविक वजह क्या रही और क्या भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर कोई खामी थी।

तेज आवाज के बाद मची भगदड़

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इमारत गिरते ही जोरदार आवाज हुई और देखते ही देखते पूरे इलाके में धूल और मलबे का गुबार छा गया। आसपास मौजूद लोगों को शुरुआती क्षणों में लगा कि शायद भूकंप आया है। कुछ ही देर में लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई और मलबे के नीचे से मदद के लिए आवाजें सुनाई देने लगीं।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बचावकर्मियों ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला, जिनमें चार बच्चे भी शामिल बताए गए हैं। एक अन्य स्थानीय व्यक्ति के अनुसार ढही हुई इमारत को ‘हॉस्टल डेज’ नाम के लड़कों के पीजी के रूप में जाना जाता था। उसने पास की एक अन्य संरचना को भी नुकसान पहुंचने की बात कही।

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में रहते हैं छात्र

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित घनी आबादी वाला इलाका है। यहां बड़ी संख्या में कॉलेज छात्र पीजी, हॉस्टल और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में पुराने भवन के ढहने की घटना ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और भवनों की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैट्स के नोडल अधिकारी बलराज सिंह के अनुसार पांच लोगों को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। शुरुआती रिपोर्टों में 25 से 30 लोगों के हताहत होने की आशंका जताई गई थी, हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मलबे में फंसे लोगों की वास्तविक संख्या की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल बचाव अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। राहतकर्मी कंक्रीट और मलबे की परतों को सावधानीपूर्वक हटाकर संभावित जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं।