बीकानेर में खेजड़ी बचाने की मुहिम में 363 संताें का अनशन

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बीकानेर। राजस्थान में बीकानेर इलाके में खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिये सख्त कानून बनाने सहित दो सूत्रीय मांगों को लेकर महापड़ाव मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। करीब 363 संतों के साथ पर्यावरण प्रेमियों ने अनशन-धरना शुरू कर दिया। लोग आंखों पर पट्टी बांध अनशन-धरने पर बैठे हैं। संतों के साथ कई भक्तों ने भोजन त्यागने का निर्णय लिया है।

संत सच्चिदानंद ने बताया कि साधुओं, संतों और पर्यावरण प्रेमियों के साथ अनशन पर कई भक्तों ने खाना छोडऩे का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि सरकार एक आदेश जारी करे कि खेजड़ी सहित 50 वर्ष पुराना पेड़ किसी भी परियोजना में काटा न जाएं। पेड़ कटता है तो उस स्थान के अधिकारियों को पाबंद किया जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएं। संत सच्चिदानंद ने कहा कि सरकार का जो करार हुआ है, उसे निरस्त किया जाए।

संत ने कहा कि सरकार हर बार आश्वासन दे रही है कि कानून बनाएंगे। जब तक सरकार यह नहीं बताएगी कि कब कानून बनेगा, तब तक अनशन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अमृता देवी ने पेड़ों की रक्षा के लिये सिर कटाएं थे। हम कानून न बनाने पर प्राण त्याग देंगे। साधू संतों ने कहा कि हमारा अंतिम लक्ष्य पेड़ बचाना है। संतों ने कहा कि जब तक वृक्ष संरक्षण अधिनियम लागू नहीं हो जाता, तब तक एक पेड़ भी नहीं कटना चाहिए।

सूत्रों ने बताया कि आन्दोलन को समर्थन करने के लिए नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के भी महापड़ाव स्थल पर आने की संभावना है। उधर, खेजड़ी को पेड़ों के लिए चल रहे इस आन्दोलन को अब नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर खेजड़ी की पूजा करते हुए फोटो शेयर की। उन्होंने लिखा- मैं भी खेजड़ी की पूजा करती हूं। राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इसे बचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह खेजड़ी और ओरण (गोचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हैं।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने भी इस आन्दोलन का समर्थन करते हुए जल्द कानून बनाने की मांग दोहराई है। पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल चाहें तो आज ही विधानसभा में घोषणा कर सकते हैं कि ये कानून बनाया जाएगा। दो दिन के अंदर कानून बनना चाहिए।