नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नयी दिल्ली स्थित कार्यालय केशव कुंज में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने झंडारोहण किया।
होसबाले ने झंडारोहण के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि हमें अत्यंत आनंद है, क्योंकि हम एक यशस्वी और उज्जवल गणतंत्र में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह इस राष्ट्र, इसके संवैधानिक मूल्यों और इसकी प्राचीन संस्कृति के रक्षा का संकल्प लेने का दिन है।
संघ सरकार्यवाह ने देश की गणतंत्र परंपरा को याद करते हुए कहा कि भारत में गणतंत्र की परंपरा बहुत प्राचीन है। हमने दुनिया को गणतंत्र की राह दिखायी है, जिसका उल्लेख बार-बार माननीय नरेन्द्र मोदी जी करते रहे हैं।
होसबाले ने देशवासियों से अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों का पालन करते हुए संविधान की, सीमाओं की और चिरंतन आध्यात्मिक परंपरा की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के सभी सामाजिक वर्ग और समुदायों का यह परम कर्तव्य है कि इसकी सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक संस्थाओं को सुरक्षित और प्रवर्धमान रखें। उन्होंने कहा कि पूजनीय बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित इस संविधान की पवित्रता का, इसकी हर अच्छी बात की रक्षा करना गर्व की बात है।
संघ सरकार्यवाह ने बताया कि यह संयोग कि बात है कि आज भीष्म अष्टमी है, 26 जनवरी 1950 को भी भीष्म अष्टमी का दिन था। उन्होंने कहा कि भीष्म पितामह स्वयं राजधर्म और प्रजाधर्म के जीवंत उदाहरण हैं, उन्होंने हमें बताया कि राजधर्म और प्रजाधर्म क्या है। शील, चरित्र और त्याग के आधार पर राष्ट्र का ऋण चुकाना होता है।
होसबाले ने कहा कि भारत के गणतंत्र का प्रतीक अशोक स्तंभ के चार सिंह हैं, जिनके नीचे आधार पर सत्यमेव जयते लिखा है। उन्होंने कहा कि यह बताता है कि हमारे तिरंगे का आधार ही सत्य है। उन्होंने कहा कि इसी प्रतीक में धर्मचक्र भी है। ये दोनों बताते हैं कि यह देश प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक सत्य और धर्म के आधार पर संचालित होता रहा है।
होसबाले ने इस राष्ट्रीय पर्व पर सभी देशवासियों से आह्वान किया कि समाज के सभी वर्ग के प्रति, विशेषकर दुर्बल वर्गों के प्रति स्नेहमय रहें और और सभी की सेवा करें। होसबाले ने झंडारोहण कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह पूछे जाने पर कि उनकी दृष्टि में वंदे मातरम् का क्या महत्व है, उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हर युवा, हर वर्ग, हर समुदाय ने वंदे मातरम् से प्रेरणा लेकर संघर्ष किया और हर पीढ़ी इससे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ती रहेगी।


