दुनिया के विश्वविद्यालयों से जुड़ेगा MDSU, विदेशी विद्यार्थियों के लिए बनेगी विशेष अकादमिक व्यवस्था

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महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की 83 वीं विद्या परिषद की बैठक संपन्न
राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र के लिए 1 करोड़ रुपए सीड मनी का प्रावधान
अजमेर। कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता मे महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 83वीं बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, शोध, विद्यार्थियों के हित तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय एवं प्रस्तावों पर विचार कर निर्णय किया गया। बैठक में अकादमिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर विशेष जोर रहा।

विदेशी विद्यार्थियों एवं वैश्विक अकादमिक सहयोग पर जोर

विश्वविद्यालय में अधिकाधिक विदेशी विद्यार्थियों को प्रवेश देने तथा विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ MoU एवं अकादमिक सहयोग बढ़ाने के लिए International Academic Affairs Advisor की व्यवस्था पर विचार कर निर्णय किया गया। इसके साथ ही Global Partnerships, Student Mobility एवं Indian Cultural Studies के लिए एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल शुरू करने तथा इसके लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र के लिए 1 करोड़ सीड मनी

बैठक में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र की स्थापना की पुष्टि की गई। राज्यपाल एवं कुलाधिपति से प्राप्त निर्देशों के क्रम में विश्वविद्यालय में केंद्र की स्थापना कुलगुरु द्वारा पूर्व में ही की जा चुकी है। विद्या परिषद के समक्ष इसकी अधिसूचना प्रस्तुत की गई। केंद्र के प्रभावी संचालन के लिए विश्वविद्यालय निधि से ₹1 करोड़ की सीड मनी का प्रावधान करने पर भी सहमति बनी।

करगिल शहीदों के आश्रित विद्यार्थियों को फीस में पूर्ण छूट

विद्या परिषद ने शहीद परिवारों के प्रति विश्वविद्यालय के सामाजिक उत्तरदायित्व को अनुभव करते हुए करगिल युद्ध में राष्ट्र की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले अमर शहीदों के आश्रित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने पर ट्यूशन फीस एवं परीक्षा शुल्क से पूर्ण छूट देने के प्रस्ताव पर निर्णय किया। संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले ऐसे विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क से मुक्त करने का भी प्रस्ताव पास किया गया।

पुनर्मूल्यांकन के लिए अब 10 दिन की अवधि

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप वर्ष में दो बार परीक्षा के आयोजन का निर्णय लेते हुए छात्र हित मे पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था को यथावत रखते हुए पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन की अवधि 10 दिन करने का निर्णय किया गया तथा इसके आवेदन की सम्पूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन रखने का प्रावधान किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को अंकतालिका का इंतजार किए बिना ही परीक्षा परिणाम एवं पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को समयबद्ध किया जा सके। विद्या परिषद में आंतरिक मूल्यांकन के संशोधित सत्रांक के संबंध मे छात्र स्पष्ट प्रक्रिया का निर्णय किया गया।

परीक्षा व्यवस्था में Integrated Answer Booklet का प्रयोग

परीक्षा प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका की अलग-अलग छपाई से होने वाले अतिरिक्त व्यय, कागज की बर्बादी तथा उत्तर पुस्तिकाओं के भंडारण की समस्या को देखते हुए Integrated Answer Booklet व्यवस्था लागू करने पर विचार किया गया। चरणबद्ध प्रयोग के रूप में इसे विज्ञान संकाय से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।

IPR के लिए व्यवस्थित व्यवस्था विकसित होगी

विश्वविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए Intellectual Property Rights (IPR) संबंधी नया Ordinance विद्या परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से पेटेंट, कॉपीराइट आदि के लिए व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करने तथा विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में पहल की गई है।

मानद D.Litt. उपाधि के लिए नियम निर्धारित

मानद Doctor of Letters (D.Litt.) उपाधि प्रदान करने के लिए नए नियमों का Ordinance तैयार किया गया है। कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित नामों के संबंध में संबंधित व्यक्तियों तथा राज्यपाल एवं कुलाधिपति की आवश्यक सहमतियां प्राप्त हो चुकी हैं। विद्या परिषद की अनुमति प्राप्त होने पर इसे आगामी प्रबंध बोर्ड की बैठक मे प्रस्तुत कर अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा।

NEP-2020 के अनुरूप नई परीक्षा संरचना

बैठक में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए तैयार की गई नई परीक्षा स्कीम पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें 30 अंक Internal Assessment तथा 70 अंक External Examination के रखे जाने, Internal Assessment में टेस्ट, हस्तलिखित असाइनमेंट और उपस्थिति जैसे घटकों को शामिल करने तथा प्रश्नपत्र को विभिन्न sections में विभाजित करने की व्यवस्था बनाने पर निर्णय लिया गया । यह व्यवस्था NEP-2020 के अनुरूप अकादमिक मूल्यांकन को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक विषयों में प्रशिक्षण की व्यवस्था

बैठक में प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक विषयों की पढ़ाई एवं प्रशिक्षण को लेकर भी चर्चा हुई। भूगोल, संगीत, ड्राइंग एवं पेंटिंग तथा अन्य प्रायोगिक विषयों में आवश्यकतानुसार कैंप/प्रायोगिक प्रशिक्षण की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए समिति गठित करने का निर्णय हुआ। बैठक में कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने विश्वविद्यालय में NEP-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों के हित में अकादमिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया।

विद्या परिषद की बैठक कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिसमे राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़, प्रो. मिलन यादव, प्रो. अनिल दाधीच, प्रो. सुभाष चन्द्र, प्रो. मोनिका भटनागर, प्रो. सुब्रतो दत्ता, प्रो. प्रेरणा जैन, प्रो दुष्यंत त्रिपाठी, प्रो. सुचेता प्रकाश, प्रो. ऋतु माथुर, प्रो. अरविन्द पारीक, प्रो. हरसुख राम छारंग सहित प्रो. विकल गुप्ता, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर; डॉ. सतीश चन्द्र, विश्वविद्यालय सामाजिक विज्ञान एवं मानवीकी महाविद्यालय, उदयपुर उपस्थित थे। बैठक का संचालन नेहा शर्मा कुलसचिव एवं वित्त नियंत्रक महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय ने किया।