राजस्थान सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की सम्पत्तियों एवं किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण के लिए राजस्थान अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध एवं किरायेदार संरक्षण विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी, राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेन्स पॉलिसी–2025 का अनुमोदन एवं प्रदेश की पहली राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी–2025 को मंजूरी सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में मंत्रिमण्डल की बैठक में ये फैसले किए गए। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगा राम पटेल, उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ एवं खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने पत्रकारों को बैठक में लिए निर्णयों की जानकारी दी।

पटेल ने बताया कि अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की सम्पत्तियों एवं किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण के लिए विधेयक राजस्थान अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध एवं किरायेदार संरक्षण विधेयक-2026 के प्रारूप को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।

देखा जा रहा है कि राज्य के कई क्षेत्रों में जनसंख्या असंतुलन की स्थिति बनने से सार्वजनिक व्यवस्था, सद्भाव एवं मेलजोल से रहने के सामुदायिक चरित्र पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उस क्षेत्र में अशांति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में उस क्षेत्र के स्थायी निवासियों को अपनी स्थायी सम्पतियां कम दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है।

इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य में अशांत क्षेत्रों में स्थाई निवासियों की सम्पत्तियों एवं उक्त सम्पत्तियों पर किरायेदारों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जा सकेगा एवं राज्य में सामुदायिक सद्भावना एवं सामाजिक संरचना कायम रखी जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इस विधेयक को अब विधानसभा के आगामी सत्र में रखा जाएगा।

राठौड़ ने बताया कि बैठक में राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेन्स पॉलिसी–2025 का अनुमोदन किया गया। यह नीति प्रदेश में रक्षा तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने के साथ ही राजस्थान को एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण का महत्वपूर्ण हब बनाने की दिशा में सहायक होगी।

इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित इकोसिस्टम के विकास पर केन्द्रित यह नीति आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगी। इस नीति के अंतर्गत प्रदेश में एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र के विनिर्माण उद्यमों, उपकरण एवं घटक निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, प्रिसीजन इंजीनियरिंग इकाइयों और रखरखाव, मरम्मत एवं ओवहॉलिंग से जुड़ी इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस नीति के अन्तर्गत विनिर्माण परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये तक अचल पूंजी निवेश को बड़ी, 300 करोड़ से एक हजार करोड़ को मेगा और एक हजार करोड़ रुपए से अधिक को अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं की श्रेणी में रखा जाएगा।

सेवा क्षेत्र के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं बड़ी, 100 करोड़ से 250 करोड़ रुपए तक मेगा और 250 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को अल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखा जाएगा।

नीति के तहत इन ए एण्ड डी पार्कों में लगने वाले पात्र एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण और सेवा उद्यमों को परिसंपत्ति सृजन प्रोत्साहन के रूप में सात वर्षों तक राज्य कर के 75 प्रतिशत पुनर्भरण के निवेश अनुदान, विनिर्माण उद्यमों के लिए 20 से 28 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र के 14 से 20 प्रतिशत तक 10 वर्षों में वितरित पूंजीगत अनुदान अथवा 10 वर्षों तक वार्षिक किश्तों में देय 1.2 प्रतिशत से दो प्रतिशत तक टर्नओवर लिंक्ड प्रोत्साहन में से किसी एक विकल्प का चयन करने की सुविधा दी जाएगी।

इसके अतिरिक्त इन प्रोत्साहनों पर टॉप-अप के रूप में 10 से 15 प्रतिशत रोजगार संवर्धन, पहली तीन मेगा अथवा अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए 25 प्रतिशत सनराइज बूस्टर, 10 प्रतिशत एंकर बूस्टर, 20 प्रतिशत थ्रस्ट बूस्टर जैसे लाभ भी प्रदान किए जाएंगे।

रीको से भूमि लेने वाले मेगा, अल्ट्रा मेगा विनिर्माण उद्यमों को 10 वर्षों तक लचीली भूमि भुगतान व्यवस्था और पांच वर्षों के लिए 25 प्रतिशत कार्यालय के लिए स्थान के लिए लीज किराया सब्सिडी का लाभ भी देय होगा।

पॉलिसी में विशेष प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है, जिनमें बैंकिंग, व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्जेज में छूट, लचीली भूमि भुगतान मॉडल, ऑफिस-स्पेस लीज रेंटल सब्सिडी जैसे प्रावधान तथा कैप्टिव पावर प्लांट में किए गए निवेश का 51 प्रतिशत पात्र स्थायी पूंजीगत निवेश में शामिल करना शामिल है।

इसके साथ ही उद्योगों को दीर्घकालिक राहत देने के लिए सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत-प्रतिशत छूट, सात वर्षों तक मंडी शुल्क अथवा बाजार शुल्क का शत-प्रतिशत पुनर्भरण, स्टाम्प शुल्क, रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण की व्यवस्था भी की गई है।

हरित प्रोत्साहन, कौशल एवं प्रशिक्षण प्रोत्साहन तथा बौद्धिक संपदा सृजन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान इस नीति को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।
उम्मीद है कि राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड रक्षा नीति–2025 से राज्य में एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, उच्च तकनीक आधारित उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

प्रदेश की पहली राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी–2025 को आज कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई। यह नीति राज्य को सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग तथा संबद्ध इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में देश का प्रमुख गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन नीति का प्रमुख उद्देश्य सेमीकंडक्टर और सेंसर्स के क्षेत्रों में एंकर निवेश को आकर्षित करना, विश्व-स्तरीय सेमीकंडक्टर पार्कों का विकास करना तथा फैबलेस डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी एवं कौशल संवर्धन, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रौद्याेगिकी हस्तातरण को भी इस नीति के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा।

नीति के अंतर्गत सेमीकंडक्टर पार्कों में अक्षय ऊर्जा, जल दक्षता, पुनर्चक्रण और सर्कुलर पहलों के माध्यम से ग्रीन विनिर्माण को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि औद्योगिक विकास पर्यावरण के अनुकूल हो सके।

इस नीति के अंतर्गत लगने वाली पात्र इकाइयों का सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध अनुमोदन सुनिश्चित किया जाएगा। नीति के अंतर्गत इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अनुमोदित परियोजनाओं को आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। इनमें सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत प्रतिशत छूट, स्टाम्प शुल्क भू-रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण शामिल है।

इसके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृत पूंजी सब्सिडी के 60 प्रतिशत के समतुल्य पूंजी अनुदान राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

बैंकों अथवा वित्तीय संस्थानों से लिए गए टर्म लोन पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान भी उपलब्ध होगा, जिससे पूंजीगत निवेश को बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पर्यावरणीय परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति, कैप्टिव पावर प्लांट के लिए सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत प्रतिशत छूट तथा राजस्थान ग्रीन रेटिंग सिस्टम के अंतर्गत प्रमाणित इकाइयों को सहमति शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा सकेगी।

इसके साथ ही रोजगार सृजन प्रोत्साहन, स्किल एवं प्रशिक्षण प्रोत्साहन, बौद्धिक संपदा सृजन प्रोत्साहन और गुणवत्ता प्रमाणन प्रोत्साहन जैसे अन्य लाभ भी नीति में देय होंगे। राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी–2025 राज्य में एक प्रतिस्पर्धी और मजबूत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करने में सहायक होगी। यह नीति निवेशकों को आकर्षित कर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगी और उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी।

गोदारा ने बताया कि प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बीकानेर जिले की बीकानेर तहसील के ग्राम लाखूसर में 72.06 हैक्टेयर भूमि एवं जैसलमेर जिले की उपनिवेशन तहसील रामगढ़ नं. दो के ग्राम रामगढ़ उत्तर में 745.41 हैक्टेयर भूमि सशर्त कीमत आवंटित करने की स्वीकृति मंत्रिमंडल द्वारा प्रदान की गई। इस निर्णयों से राज्य की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और आमजन को सुगम विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

राजस्थान लोक सेवा आयोग में उप सचिव (परीक्षा), उप सचिव एवं परीक्षा नियंत्रक के पदनाम को परिवर्तित कर उप सचिव किया जाने का निर्णय लिया गया है। आरपीएससी कार्यालय में मुख्य परीक्षा नियंत्रक (आईएएस) के पद सृजन के पश्चात् परीक्षा नियंत्रक से संबंधित कार्यों का दायित्व मुख्य परीक्षा नियंत्रक द्वारा किया जा रहा है। इन तीनों पदों के पदनाम परिवर्तन के बाद अब आयोग में उप सचिव स्तर के अधिकारियों का कार्य-विभाजन पदनाम के बजाय आयोग की आवश्यकता के अनुसार किया जा सकेगा।

आरपीएससी में सहायक सचिव एवं निजी सचिव संवर्ग से उप सचिव के पद पर पदोन्नति अब क्रमशः 10:1 के अनुपात में की जाएगी। यह निर्णय इन संवंर्गों की वर्तमान कैडर स्ट्रेन्थ को देखते हुए लिया गया है। आरपीएससी में सचिव अथवा ऐसे कोई भी अधिकारी जो राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा का सदस्य नहीं है, उसका अनुशासनिक अधिकारी अब उसकी संबंधित सेवा का ही प्राधिकारी होगा।

वहीं आयोग के वरिष्ठ उप सचिव, उप सचिव, सहायक सचिव, निजी सचिव एवं अनुभाग अधिकारी के संबंध में आयोग के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा नामित सदस्य अनुशासनिक प्राधिकारी होंगे तथा राज्यपाल पुनरीक्षण प्राधिकारी होंगे। सेवा से हटाने अथवा बर्खास्तगी का दण्ड राज्यपाल की स्वीकृति से ही दिया जाएगा, जबकि सहायक सचिव, निजी सचिव एवं अनुभाग अधिकारी के पदों पर माइनर पेनल्टी सचिव द्वारा लगाई जा सकेगी। इन सभी प्रावधानों के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (राजपत्रित स्टाफ) सेवा नियम एवं विनियम, 1991 में संशोधन को आज मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी प्रदान की गई।

राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में किसी भी प्रकार से बाल विवाह में भाग लेने, उसकी संविदा करने अथवा स्वयं बाल विवाह करने वाले सरकारी कर्मचारी को अनुशासनिक कार्यवाही के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है। इस नियम में बाल विवाह का अर्थ अब बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 2006 के अनुरूप माना जाएगा। इस अधिनियम में बालक की परिभाषा 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष तथा 18 वर्ष से कम आयु की महिला के रूप में निर्धारित की गई है।

इसके लिए राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन किया गया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गरीब, युवा, अन्नदाता एवं नारीशक्ति के कल्याण के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार जल्द ही ‘ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट, ग्राम 2026’ का आयोजन करने जा रही है। इसके बारे में भी आज मंत्रिपरिषद में चर्चा की गई।