एसोशिएशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ़ इंडिया
जयपुर। एसोसिएशन ऑफ स्माल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया (असमनी) के तत्वावधान में कलानेरी परिसर में आज सामाजिक सरोकार एवं अपराध विषयक पत्रकारिता पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस वर्ष असमनी का यह पहला एकेडमिक कार्यक्रम था।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क आयुक्त राकेश शर्मा थे। राकेश शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र को साधने में कलम का उपयोग विवेक सम्मत होना चाहिए। पत्रकारों को व्यक्तिगत लांछनो से बचना चाहिए। एआई के बढ़ते प्रयोग को बहुत सावधानी से उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला को मीडियाकर्मियों के लिए बहुत उपयोगी बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर होते रहने चाहिएं।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री गुलाब बत्रा ने कहा कि सामाजिक सरोकार एवं अपराध एक दूसरे से जुड़े हैं। वर्तमान में इस विषय पर लिखना बहुत ही दुष्कर कार्य है। उन्होंने वर्तमान समय में इस विषय पर की जा रही पत्रकारिता को बहुत ही सावधानी पूर्वक किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पत्रकार, विधायक गोपाल शर्मा ने समाचारों में सामाजिक सरोकारों से जुड़े पहलुओं को उजागर करने की आवश्यकता बताई एवं अपराधों की रोकथाम के लिए आमजन के कड़े विरोध के प्रति जनता को जागरूक करने में समाचार पत्रों की अहम भूमिका के बारे में भी बताया।
एक अपराधी का उदाहरण देकर बताया कि जेल से फरार अपराधी नाम बदलकर,पत्रकार बनकर समाज के मध्य अपनी दादागिरी कर रहा था। कैसे पुलिस ने पकड़कर उसे वापिस हवालात का रास्ता दिखाया। उन्होंने पत्रकारों की मांग मुख्यमंत्री है तक पहुंचाकर हल कराने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के विशेष अधिकारी श्री गोविंद पारीक अस्वस्थता के चलते नही आ पाए उनका भेजा संदेश भी गोपाल गुप्ता द्वारा पढ़कर सुनाया गया।
असमनी, राजस्थान के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर विशेषाधिकारी, सलाहकार, कॉर्डिनेटर एवं आयुक्त को पत्र लिखकर सम्मान निधि में वृद्धि, राजस्थान रोडवेज में अंतिम गंतव्य स्थल तक यात्रा फ्री,सम्मान निधि के नियमों में सरलीकरण जिससे वांछित पत्रकार भी पात्र हो सकें, सर्किट हाउस में रियायती निर्धारित दर पर ठहराव व्यवस्था, लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को माह में कम से कम तीन सजावटी विज्ञापन, महाराष्ट्र की तर्ज पर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए जाना इत्यादि अनेकों समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया।
कार्यशाला को पत्रकार हरीश पाराशर ने भी सामाजिक सरोकारों से जुड़े समाचारों को प्रमुखता दिए जाने पर जोर दिया। ऐश्वर्या प्रधान ने कहा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अभिव्यक्त शब्दों का विशेष महत्व होता है। कई बार छोटे समाचार पत्रों में छपी खबरों पर चैनल बहस करने पर मजबूर हो जाते हैं। मदन कलाल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके। उनके वक्तव्य का वाचन अमृता मौर्य ने किया।
आमंत्रित वक्ताओं ने सामाजिक सरोकार एवं अपराध आधारित पत्रकारिता के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला और फील्ड से की जाने वाली ऐसी रिपोर्टिंग के तकनीकी पक्षों की विस्तार से जानकारी दी। उपस्थित पत्रकारों ने वक्ताओं एवं आयुक्त से सवाल भी किए।
कार्यशाला में डीग जिला स्थित बहज के टीलों से खुदाई में मिले ब्राह्मी लिपि सहित महाभारत और गुप्त कालीन पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया। पुरातत्व विभाग द्वारा निर्मित इस लघु वृत्तचित्र का सार्वजनिक प्रदर्शन पहली बार किया गया है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी पत्रकार बंधुओं को नए वर्ष के कैलेंडर के साथ ही अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई गयी।
कार्यक्रम में राजेन्द्र बोडा, अशोक चतुर्वेदी, राजेंद्रराज, ललित शर्मा वरिष्ठ पत्रकारों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के संयोजक एसजी शर्मा ने बताया कि कई ऐसे कानूनी पहलू हैं जिनके बारें में मैने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। अगर मेरे सुझाव माने गए तो कोर्टों में लंबित पड़े आधे मुकदमे निपट जाएंगे। उन्होंने सभी उपस्थित मेहमानों एवं पत्रकारों का धन्यवाद भी ज्ञापित किया।




