नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में खुद पेश होकर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये उनके राज्य को चयनात्मक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने ईसीआई के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। इसमें आरोप लगाया गया है कि मौजूदा एसआईआर कवायद से बड़े पैमाने पर मतदाताओं का हक छीना जायेगा। उन्होंने इसे एक अपारदर्शी, जल्दबाजी वाली, असंवैधानिक और गैरकानूनी प्रक्रिया बताया।
इसके बाद सुप्रीमकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली उनकी रिट याचिका पर चुनाव आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर उससे सोमवार तक जवाब देने को कहा। मामले की जैसे ही सुनवाई शुरू हुई तो वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका की गंभीरता का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मामला आइटम संख्या 36 और 37 के रूप में सूचीबद्ध नये विषयों से संबंधित है।
जब न्यायालय ने संकेत दिया कि वह जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं पोडियम तक गईं और पीठ को सीधे संबोधित करने का आग्रह किया। बनर्जी ने तर्क दिया कि यह एसआईआर प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि विवाह के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं या निवास बदलने वाले गरीब प्रवासियों जैसी सामाजिक वास्तविकताओं के कारण होने वाली मामूली विसंगतियों के आधार पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने न्यायालय को बताया कि मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति के आधार पर हटा दिए गए, भले ही वह विसंगति केवल उपनाम या वर्तनी की भिन्नता मात्र थी। गरीब लोगों जो बाहर जाते हैं, उनके नाम हटा दिए गए हैं। यह निष्कासन का आधार क्यों होना चाहिए। बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के समय और इसके चयनात्मक होने पर सवाल भी उठाया।



