सुल्तानपुर लोधी में आवारा कुत्तों के झुंड ने मासूम को नोच-नोच कर मार डाला

0

जालंधर। पंजाब में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों के बीच सुल्तानपुर लोधी से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। खेतों में अपने पिता को खाना देने गए आठ वर्षीय मासूम बच्चे पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।

मृतक बच्चे की पहचान आठ वर्षीय इतवारी के रूप में हुई है, जो सुल्तानपुर लोधी के गिला गाखला गांव का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि उसका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बहराइच का निवासी है और कामकाज के सिलसिले में यहां रह रहा था। परिवार मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रहा था, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं।

इतवारी अपनी मां के साथ खेत पर पिता को खाना देने गया था। जहां बच्चा शौच के लिए खेत में चला गया। इसी दौरान आवारा कुत्तों का झुंड आया और उस पर हमला कर दिया। इस दौरान कुत्तों ने उसके सिर पर सबसे ज्यादा नोचा, इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों पर भी काट लिया। पुत्र के चिल्लाने की आवाज सुनकर माता-पिता भागे और पुत्र को कुत्तों के चंगुल से छुड़वाया। इसके बाद वे तुरंत बच्चे को गंभीर हालत में इलाज के लिए सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

मृत बच्चे के पिता मुनेजर ने बताया कि वह खेतों में आलू की बुआई कर रहे थे। दोपहर में पत्नी के साथ बेटा खाना देने के लिए आया था। जिसके बाद पुत्र
ने शौच जाने के लिए कहा और और वह खेत में चला गया, वहां पर पुत्र पर पांच से छह कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। बच्चे के चाचा ने बताया कि हम लोग खेत में काम कर रहे थे। इस दौरान हम खाना खाने के लिए चले गए और बच्चा शौच के लिए खेत में चला गया, जहां उसे कुत्तों ने घेर लिया और नोच दिया। बच्चे के रोने की आवाज सुन उसे कुत्तों से छुड़वाया और सुल्तानपुर लोधी ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उसे सिविल अस्पताल जालंधर रेफर कर दिया। बच्चा माता-पिता की इकलौती संतान था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। खेतों और गलियों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते रहते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को हमेशा खतरा बना रहता है। लोगों ने कई बार प्रशासन से शिकायत भी की, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।