
सबगुरु न्यूज-आबूरोड। आबूरोड नगर पालिका में भाजपा के बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के बाद दो काम पैरेलल हुए।
एक स्थानीय विधायक मोतीराम कोली के द्वारा विधानसभा के माध्यम से नगर पालिका में अनुबंधित कार्मिकों के पिछले पांच साल के बिलों की प्रतिलिपि पब्लिक डोमेन में आई। दूसरी आबूरोड नगर पालिका में अनुबंधित कार्मिकों के ठेकों में ईएसआई के भुगतान में अनियमितता की शिकायत संबंध में कर्मचारी राज्य बीमा निधि की तरफ से आयुक्त फेक्ट रिपोर्ट मंगवाना। सूत्रों के अनुसार ये रिपोर्ट भेजी नहीं गई है इसी वजह हकीकत सामने नहीं आ पाई और भाजपा के ही एक निवर्तमान पार्षद अर्जुन सिंह ने भी इस पर अंगुली उठाई है।
– समझिए ये खेल
हमारे पास से 2021 से जून 2025 तक के संविदा कर्मियों के नियोजन के बिल और भुगतान की सूचना है। करीब 700 पेज को इस सूचना में कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, ड्राइवर, केशियर, हेल्पर, सफाई कर्मी आदि के नियोजन की सूचना और उनके लिए ठेकेदार को किया गए भुगतान का रिकॉर्ड है। यहां जो बिल दिखाया है वो सिर्फ जून 2025 की संविदा नियुक्ति का है। इस वाले में सौ से अधिक सफाई कर्मियों का नियोजन का बिल शामिल नहीं किया है, उसे शामिल करने पर बिल की राशि इससे भी ज्यादा हो जाती।
जून के इस बिल में करीब 102 कार्मिकों के मानदेय के भुगतान की राशि दी हुई है। ये राशि 19 लाख 35 हजार 990 रुपए की है। बिल एक जुलाई 2025 को प्रस्तुत किया गया और इसका भुगतान का चेक 3 जुलाई को ज़ारी दिया गया। इस राशि में 18% जीएसटी, 13.15% राशि पीएफ की, 3.25% राशि ईएसआई की और 2500 रुपए प्रति व्यक्ति राशि सर्विस टैक्स की है। आरोप ये लग रहा है कि ठेकेदार के द्वारा कर्मचारियों को पीएफ और ईएसआई का भुगतान नहीं किया जाता है। फिर भी ये राशि नगर पालिका से हर महीने उठाई जाती है। सबगुरु न्यूज ने आबूरोड नगर पालिका में संविदा काम कर चुके पुराने कार्मिकों की इस संदर्भ में बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने साल दो साल पहले नगर पालिका में संविदा कर्मी का काम छोड़ दिया है लेकिन, जब वे वहां ठेकेदार के माध्यम से लगे थे तब भी उन्हें पीएफ और ईएसआई का भुगतान नहीं किया जाता था।
– ऐसा है तो अध्यक्ष और ईओ की भूमिका संदिग्ध
आबूरोड नगर पालिका का पांच साल का रिकॉर्ड बता रहा है कि संविदा कर्मियों के लिए ठेकेदार को पीएफ और ईएसआई की राशि दी जाती थी। नगर पालिका की संविदा नियुक्ति की ठेके की शर्त में ही लिखा हुआ है कि प्रति माह बिल के भुगतान से पहले पिछले महीने की ईएसआई और पीएफ के भुगतान को रसीदें प्रस्तुत करनी होगी। ये शर्तें आबूरोड नगर पालिका के अध्यक्ष और ईओ ही तय करते हैं तथा टेंडर में दोनो के हस्ताक्षर होते हैं। इनके बिल का भुगतान भी इनके संयुक्त हस्ताक्षर से होते हैं।
ऐसे में अपनी ही बनाई शर्तों के मुताबिक प्रति माह पीएफ और ईओ पीएफ और ईएसआई की राशि को संविदा कर्मियों के खाते में जमा करवाने की रसीद देखने के बाद अगले महीने बिल साथ पीएफ और ईएसआई का भुगतान किया जाना चाहिए था। लेकिन, खुद भाजपा के पार्षदों और पदाधिकारियों द्वारा इस बात की शिकायत की गई है कि नगर पालिका द्वारा ठेकेदार को पीएफ और ईएसआई का भुगतान तो किया जाता था। लेकिन, ठेकेदार द्वारा ये राशि कार्मिकों के खाते खुलवाकर उसमें जमा नहीं कराई जाती थी। इसका हिसाब लिए बिना ही हर महीने ये राशि दी जाती रही।
ये राशि प्रति कार्मिक औसतन करीब एक हजार रुपए होती है। नगर पालिका आबूरोड में हर महीने अनुमानित 200 कार्मिक संविदा पर लगाए जाते हैं। इस हिसाब से प्रति माह पीएफ और ईएसआई का ही दो लाख रुपए अतिरिक्त ठेकेदार को अध्यक्ष और ईओ द्वारा दिया जा रहा है। आरोप ये लगा है कि ये गड़बड़ झाला पिछले पांच साल से चल रहा है। ये आरोप पूर्णतः सच हैं तो पांच साल में हे साल करीब बीस से चौबीस लाख रुपए नगर पालिका से अतिरिक्त उठाए जा रहे हैं। ऐसे में ये अनियमितता सरकारी धन के दुरुपयोग या गबन की श्रेणी में आती है। इसकी पारदर्शी जांच के बाद इसकी वसूली और कानूनी कार्रवाई जरूरी हो जाती है।


