सिरोही:वार्ड पंचों ने दिया तीन बच्चों के सबूत, प्रशासन पर बिना जांच प्रशासक बनाने के आरोप 

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आबूरोड पंचायत समिति की किंवरली ग्राम पंचायत में ग्राम सभा में बैठे वार्ड पंच।

सबगुरु न्यूज- सिरोही। आबूरोड पंचायत समिति की किवरली पंचायत में चुने हुए जनप्रतिनिधियों और लोगों में आक्रोश है। वो इस बात का कि उनकी पंचायत समिति के अनुसूचित जनजाति के प्रशासक को प्रशासन ने कथित मामूली अनियमितता के चलते निलंबित कर दिया है, उनकी जगह उस निवर्तमान जनप्रतिनिधि को प्रशासक नियुक्त कर दिया जिसके खिलाफ ग्राम पंचायत में तीन बच्चे होने के कारण प्रशासक नहीं बनाने प्रस्ताव जिला कलेक्टर को दिया गया था। अब इसमें ग्रामीण राजनीतिक हस्तक्षेप देख रहे हैं।

आबूरोड की किंवरली ग्राम पंचायत के प्रशासक के निलंबन और कार्यवाहक प्रशासक नियुक्त करने के आदेश।

– जिला कलेक्टर को दी थी शिकायत

किवरली ग्राम पंचायत के प्रशासक रमेश कुमार को सरकार ने अनियमितता के चलते फरवरी में निलंबित कर दिया था। इसके बाद यहां पर कार्यवाहक प्रशासक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रशासक पद पर सरकार ने सरपंचों को नियुक्त किया था। उनके निलंबन पर आम तौर पर सरकार द्वारा उप सरपंच को जवाबदेही देने का रिवाज है। ऐसे में वार्ड पंचों ने 20 मई और 25 मई को जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया। इसमें दस्तावेजों के साथ ये बताया गया कि निवर्तमान उप सरपंच के तीन जीवित संताने हैं। इसलिए पंचायत राज अधिनियम के तहत उसे प्रशासक का कार्यभार नहीं सौंपा जाए। वार्ड पंचों ने इसके लिए ग्रामसभा में प्रस्ताव भी लिया था। ज्ञापन में तीन संतानों की जाँच होने तक प्रशासक का कार्यभार आबूरोड पंचायत समिति के विकास अधिकारी को सौंपने की मांग की थी। ज्ञापन में ये भी आरोप लगाया गया कि निवर्तमान उप सरपंच महिला हैं, उनकी जगह उनके देवर पंचायत में काम देखते हैं।

– बिना जांच सौंपा पदभार!

वार्ड पंचों ने 20 और 25 मई को ज्ञापन सौंपने के बाद 26 मई को इस संबंध में पंचायत सभा आयोजित की। इसमें प्रस्ताव संख्या पांच लेकर निवर्तमान उप सरपंच के तीन बच्चे होने के कारण प्रशासक का पदभार पंचायत समिति के बीडीओ को सौंपने की सहमति जताई इसकी प्रति भी जिले कलेक्टर को भिजवा दी। गांव में इस बात को लेकर असंतोष है कि तीन संतानों की जाँच के सबूत देने के बाद भी जांच किये बिना जिला कलेक्टर ने निवर्तमान उप सरपंच को कार्यभार संभाला दिया। इसके लिए 27 मई को अपने कार्यालय से आदेश पारित कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सिरोही के एक नेता के राजनीतिक दबाव प्रशासन ने उनको सौंपे जी सबूतों की जांच के बिना ही ये आदेश जारी कर दिया है। वार्ड पंचों का कयास है कि यदि जांच की गई होती तो शिकायत कर्ता रूप में जांच रिपोर्ट उन तक भेजी जाती। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया।