बेंगलूरु। कर्नाटक में शिवमोगा स्थित त्यावरेकोप्पा चिड़ियाघर में दरियाई घोड़े के हमले में पशु चिकित्सक डॉ. समीक्षा रेड्डी की दर्दनाक मौत के बाद राज्य में वन्यजीव संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस बीच सरकार ने उनके परिवार के लिए 30 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
अधिकारियों के अनुसार हाल ही में पशु चिकित्सा अधिकारी नियुक्त हुई 27 वर्षीय डॉ. समीक्षा रेड्डी प्रशिक्षण पर थीं। वह गुरुवार देर रात नियमित ड्यूटी के दौरान हमले का शिकार हो गईं। बताया गया कि रात करीब 10:30 बजे एक पक्षी का इलाज करने के बाद वह एक गर्भवती दरियाई घोड़ी के बाड़े में उसकी शारीरिक स्थिति की निगरानी के लिए थर्मल कैमरा लेकर गईं। इसी दौरान जानवर आक्रामक हो गया और उसने उन पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर आंतरिक चोटें आईं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां सर्जरी के बाद शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कर्नाटक के मंत्री ईश्वर खंड्रे ने मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने राज्य के सभी चिड़ियाघरों में जंगली जानवरों से निपटने के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपीएस) का सख्ती से पालन करने के निर्देश भी दिए।
सरकार ने वरिष्ठ पशु चिकित्सकों और वन अधिकारियों की अगुवाई में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
इस घटना के बाद वन्यजीव संस्थानों में कर्मचारियों की सुरक्षा, प्रशिक्षण में कमी और प्रक्रियागत चूक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ रिपोर्टों में यह भी सवाल उठाए गए हैं कि डॉ. रेड्डी बिना अतिरिक्त सुरक्षा या बेहोश करने की व्यवस्था के बाड़े के पास क्यों गईं, जिससे सुरक्षा प्रबंधन में संभावित खामियों की ओर संकेत मिलता है। जांच जारी रहने के बीच विशेषज्ञों और वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा प्रोटोकॉल, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और उच्च जोखिम वाले जानवरों के साथ काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बेहतर सुरक्षा उपायों की समीक्षा की मांग की है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां सुनिश्चित की जाएंगी। सरकार की ओर से त्वरित मुआवजा और जांच के आदेश को न केवल परिवार को राहत देने, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन प्रणाली में जवाबदेही और सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



