नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा तथा विधानसभा सीटों की परिसीमन संबंधी नीति को गलत बताते हुए उसको लेकर जारी प्रचार को भ्रामक बताया और कहा कि इस मुद्दे पर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जय राम रमेश ने रविवार को यहां एक बयान में कहा कि परिसीमन के जरिए सीटें बढ़ाना सिर्फ चुनाव जीतने की रणनीति है और मोदी इसको लेकर भ्रामक बयान देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। रमेश के इस बयान का समर्थन पार्टी नेता मनीष तिवारी ने भी किया है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन से लोकसभा सीटों में प्रस्तावित वृद्धि से बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को अनुपातिक रूप से अधिक लाभ मिलेगा, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ ही पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पूर्वी राज्यों का प्रभाव कम हो जाएगा।
कांग्रेस के अनुसार वर्तमान में उत्तर प्रदेश और केरल के बीच लोकसभा सीटों का अंतर 60 है, जो प्रस्ताव लागू होने पर 90 तक पहुंच सकता है, वहीं उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच का अंतर भी 41 से बढ़कर कम से कम 61 हो जाएगा।
पार्टी ने इसे बिना सहमति और बिना व्यापक परामर्श तथा जनविमर्श के उठाया गया कदम बताते हुए इसे थोपा जाने वाला प्रस्ताव करार दिया और आरोप लगाया कि लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि और विधानसभाओं की सीटों में समान वृद्धि का तर्क भ्रामक है और इससे क्षेत्रीय असंतुलन और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम बड़े राज्यों को और अधिक लाभ पहुंचाने वाला है जबकि छोटे और अन्य राज्यों का सापेक्षिक प्रतिनिधित्व घटेगा।
रमेश ने यह भी कहा कि देश इस समय गंभीर आर्थिक और विदेश नीति संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री का ध्यान केवल सीटों की संख्या बढ़ाने पर केंद्रित है, जो ध्यान भटकाने का एक हथकंडा मात्र है।
कांग्रेस के लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने भी रमेश के विचार को सही बताया और कहा कि इस बारे में मोदी का दृष्टिकोण पूरी तरह से गलत है। वास्तविक स्थिति यह है कि इस कदम से दक्षिण भारत, पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर के राज्य और उत्तर पश्चिमी क्षेत्र, हिंदी भाषी राज्यों की तुलना में राजनीतिक रूप से कमजोर हो जाएंगे और खासकर संसद सीटों की संख्या का अंतर बहुत बढ़ जाएगा।



