बेंगलूरु। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के टिकटों की कथित कालाबाज़ारी के रैकेट को लेकर बढ़ती जांच-पड़ताल के बीच कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) ने बुधवार को खुद को चल रही जांच से अलग कर लिया।
वहीं, बेंगलूरु पुलिस की जांच में कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया गया है, जिसमें अंदरूनी लोग, कॉर्पोरेट आवंटन और क्रिकेट जगत से जुड़े कुछ व्यक्तियों के साथ संदिग्ध संबंध शामिल हैं।
यहां जारी एक बयान में के केएससीए के प्रवक्ता विनय मृत्युंजय ने देकर कहा कि एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु (आरसीबी) के मैचों के लिए आम जनता को टिकट बेचने में संघ की कोई भी भूमिका नहीं थी।
उन्होंने कहा कि आम जनता के लिए टिकटों की बिक्री पूरी तरह से फ्रेंचाइजी के अधिकृत प्लेटफॉर्म और टिकटिंग पार्टनर्स के माध्यम से की जाती है, जबकि केएससीए को केवल संबद्ध क्लबों, स्थायी सदस्यों और चुनिंदा वैधानिक प्राधिकरणों के लिए एक सीमित आरक्षण मिलता है। संघ ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें उसे इस मामले के आरोपियों से जोड़ा जा रहा था।
संघ ने कहा कि जांच के दायरे में आए संस्थाओं और व्यक्तियों का केएससीए के साथ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है और वे इस संस्था के सदस्य भी नहीं हैं। केएससीए ने केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी ) के साथ पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। सीसीबी ही आईपीएल टिकटों की कथित तौर पर बहुत ज़्यादा कीमतों पर दोबारा बिक्री के मामले की जांच कर रही है।
केएससीए का यह स्पष्टीकरण बेंगलूरु पुलिस की तेज़ होती जांच के बीच आया है। इस सीज़न में आरसीबी के ज़्यादा मांग वाले मैचों से जुड़े कथित ब्लैक-मार्केट रैकेट के सिलसिले में अब तक कम से कम 11 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
जांचकर्ताओं के अनुसार ऑनलाइन कॉर्पोरेट आवंटन के ज़रिए खरीदे गए टिकटों को कथित तौर पर दूसरी जगह भेज दिया गया और स्टेडियम के बाहर तथा अनौपचारिक नेटवर्क के ज़रिए बहुत ज़्यादा कीमतों पर फिर से बेच दिया गया।
पुलिस ने बताया कि जांच में तब तेज़ी आई जब एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के अंदर काम करने वाले कैंटीन कर्मचारी चंद्रशेखर पी को गिरफ्तार किया गया। उसे कथित तौर पर 15 अप्रैल को आरसीबी और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच हुए मैच के दौरान ब्लैक मार्केट में 180 से ज़्यादा आईपीएल टिकट बेचने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था।
इन टिकटों की मूल कीमत 1,200 रुपए से 13,000 रुपए के बीच थी, लेकिन कथित तौर पर इन्हें 15,000 रुपए से लेकर 32,000 रुपए प्रति टिकट तक की ऊंची कीमतों पर फिर से बेचा गया।
जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें निजी फर्मों और कॉर्पोरेट चैनलों के ज़रिए बड़ी संख्या में टिकट खरीदे जाते थे और फिर उन्हें दलालों और बिचौलियों के ज़रिए फिर से बेचा जाता था। सीसीबी की जांच में पता चला कि कम से कम 181 टिकट, जिनकी कीमत लगभग 17.52 लाख रुपए थी, उन्हें अवैध रूप से फिर से बेचने के लिए दूसरी जगह भेज दिया गया था।
पुलिस केएससीए से जुड़े कथित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिनमें गणेश हरिकेश भी शामिल है। माना जा रहा है कि वह फरार है और इस नेटवर्क का एक मुख्य व्यक्ति होने का संदेह है। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या कॉर्पोरेट या अंदरूनी आवंटन तक विशेष पहुंच ने बेंगलूरु में आईपीएल के बड़े मैचों के दौरान सुनियोजित तरीके से ब्लैक मार्केटिंग करने में मदद की।
इस विवाद ने बेंगलूरु क्रिकेट प्रशासन पर उस समय दबाव और बढ़ा दिया है, जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल 2026 के प्लेऑफ़ और फ़ाइनल मैच बेंगलूरु से बाहर शिफ़्ट कर दिए हैं। जहां फ़ाइनल मैच की मेज़बानी अहमदाबाद करेगा, वहीं प्लेऑफ़ मैच मुल्लनपुर और धर्मशाला को दिए गए हैं।
बीसीसीआई ने हालांकि इसके पीछे ऑपरेशनल और लॉजिस्टिकल कारणों का हवाला दिया है, और यह भी कहा है कि स्थानीय अधिकारियों और एसोसिएशन की कुछ ऐसी मांगें थीं जो कथित तौर पर मौजूदा आईपीएल प्रोटोकॉल से बाहर थीं। फिर भी केएससीए ने इस फ़ैसले पर सार्वजनिक रूप से निराशा ज़ाहिर की है।



