वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमरीका और ईरान के बीच एक समझौता काफी हद तक तय हो गया है। उनके इस बयान से यह उम्मीद जगी है कि महीनों से चला आ रहा संघर्ष आखिरकार खत्म हो सकता है और दुनिया के सबसे अहम शिपिंग मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही फिर से खुल सकता है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा है कि इस समझौते में अमरीका, ईरान और कई अन्य देश शामिल हैं, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ मुद्दों पर अभी भी काम होना बाकी है। उन्होंने लिखा कि समझौते के अंतिम पहलुओं और विवरणों पर अभी चर्चा चल रही है और जल्द ही इनकी घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि समझौते के कई अन्य तत्वों के अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को भी खोला जाएगा।
वहीं. अमरीका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को नई दिल्ली में कहा कि अभी तक कुछ भी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। बातचीत से परिचित लोगों का कहना है कि इस समझौते से शत्रुता पर विराम लगेगा, होर्मुज जलडमरूमध्य धीरे-धीरे फिर से खुल जाएगा, ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों में ढील मिलेगी और विदेशों में जमा ईरान की कुछ संपत्तियां मुक्त हो जाएंगी।
इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का एक नया दौर भी शुरू होगा, जो अभी भी सबसे पेचीदा मुद्दा बना हुआ है। एक अहम अड़चन यह है कि ईरान के पास जमा अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार का क्या किया जाए। मौजूदा प्रस्ताव में कथित तौर पर इस मुद्दे और अन्य अनसुलझे सवालों पर कूटनीतिक बातचीत जारी रखने के लिए कम से कम 30 दिनों का समय निर्धारित किया गया है।
दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप द्वारा पेश किए गए समझौते के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई है। सरकार से जुड़ी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज़ ने कहा कि दावा किया है कि जलडमरूमध्य पूरी तरह से फिर से खोल दिया जाएगा। ईरान द्वारा वास्तव में दी गई सहमति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है।
एजेंसी के अनुसार ईरान ने केवल शिपिंग (जहाजी आवाजाही) को संघर्ष-पूर्व के स्तर पर बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई है, जो कि बिना किसी रोक-टोक के आवागमन की अनुमति देने जैसा नहीं है। बताया जा रहा है कि यह समझौता दो चरणों में लागू होगा। पहले चरण में, ईरान जलडमरूमध्य से होने वाली समुद्री आवाजाही को युद्ध-पूर्व के स्तर पर वापस लाएगा, परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प लेगा और ईंधन तथा तेल का निर्यात फिर से शुरू करेगा।
दूसरा चरण, जिसके 30 से 60 दिनों तक चलने की उम्मीद है। इसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम और व्यापक क्षेत्रीय परिदृश्य से जुड़े अधिक कठिन सवालों पर केंद्रित होगा। इस पहल को तब और बल मिला जब कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने कथित तौर पर शनिवार को तेहरान में ईरानी अधिकारियों के साथ बैठक की।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कई खाड़ी देशों, साथ ही तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और पाकिस्तान के नेताओं के साथ हुई बातचीत को फलदायी बताते हुए, शांति की दिशा में ट्रंप के असाधारण प्रयासों की तारीफ़ की। ट्रंप ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई एक अलग बातचीत का भी ज़िक्र किया, जिसे उन्होंने रचनात्मक बताया।
हालांकि, इज़राइली अधिकारी कुछ बेचैन हैं। उन्हें चिंता है कि कोई भी अंतरिम समझौता, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस प्रतिबद्धताएं हासिल किए बिना, कहीं सिर्फ़ युद्धविराम और प्रतिबंधों में राहत देने पर ही ज़्यादा केंद्रित न रह जाए।
ख़बरों के मुताबिक अमरीका लगातार इज़राइल को यह भरोसा दिला रहा है कि परमाणु मुद्दे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा रहा है। ट्रंप ने इससे पहले किसी समझौते पर पहुंचने की संभावना को 50-50 बताया था, और चेतावनी दी थी कि अगर कूटनीति नाकाम रही, तो सैन्य कार्रवाई का रास्ता फिर से खुल सकता है, लेकिन फ़िलहाल, अमरीका, ईरान और इस क्षेत्र के अधिकारियों के बीच का माहौल सावधानी भरी उम्मीद से भरा नज़र आ रहा है जो कि हाल के महीनों में किसी भी अन्य समय की तुलना में कहीं ज़्यादा सकारात्मक है।



