जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी पीड़िता की अश्लील फोटो या वीडियो को खुली अदालत रिकॉर्ड में पेश नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने इसे पीड़िता की गरिमा, निजता और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है।
न्यायमूर्ति अनूप ढंढ ने गुरुवार को कहा कि आजकल जमानत याचिकाओं, आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं, धारा 397/482 सीआरपीसी के मामलों और याचिकाओं में आरोपी या पुलिस द्वारा निजी और अंतरंग फोटो-वीडियो सीडी या पेनड्राइव के रूप में खुले तौर पर संलग्न किए जा रहे हैं।
इनका उद्देश्य कथित तौर पर सहमति साबित करना बताया जाता है, लेकिन इससे पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होती है और उसे मानसिक आघात पहुंचता है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निजी या अश्लील सामग्री को खुले तौर पर रिकॉर्ड में लगाना पीड़िता का अशोभनीय चित्रण है और यह उसके निष्पक्ष जांच एवं सुनवाई के अधिकार का हनन है।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य में कोई भी पक्ष, चाहे वह पुलिस हो या आरोपी, किसी भी निजी अथवा अश्लील फोटो-वीडियो को खुली फाइल, याचिका, शपथ पत्र या आरोप पत्र के साथ संलग्न नहीं करेगा। ऐसी सामग्री केवल सीलबंद लिफाफे या पासकोड-लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही प्रस्तुत की जाएगी। पासकोड केवल संबंधित कोर्ट मास्टर को बताया जाएगा।
हाई कोर्ट ने यह आदेश उच्चतम न्यायालय के चर्चित मामले निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ के संदर्भ में जारी किया। साथ ही कहा कि न्यायालय रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी होगी कि वह प्रत्येक मामले की जांच करके पीड़िता की पहचान उजागर होने से रोके।
हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि इस संबंध में स्थायी आदेश और सर्कुलर जारी करने के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए। साथ ही रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की प्रति राजस्थान के सभी न्यायिक अधिकारियों, गृह विभाग, डीजीपी, विधि सचिव और अभियोजन निदेशक को भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जा सकें कि पीड़िताओं की अश्लील फोटो-वीडियो खुले रिकॉर्ड में दाखिल न हों।
न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि नैतिक रूप से निजी पलों को रिकॉर्ड नहीं किया जाना चाहिए और कोई व्यक्ति ऐसे वीडियो या फोटो सार्वजनिक करके किसी साथी को बदनाम करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।



