कोटा। राजस्थान में कोटा में पुलिस ने चन्द्रेसल मठ के मंहत देवानंद हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए साजिशकर्ता सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सिटी पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने गुरुवार को बताया कि पांच जून को रात में चंद्रेसल मठ के देवानंद महाराज की हत्या कर दी गई थी।
घटना की गंभीरता एवं संत की हत्या से जुडा मामला होने से संतों के आक्रोश एवं हिन्दू समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए घटना के खुलासे के लिए पुलिस ने इस मामले की गहनता से जांच की और मुख्य साजिशकर्ता संतोष राय (52) और पुष्पेंद्र सिंह (20) का गिरफ्तार कर लिया। संतोष राय ने ही एक लाख रुपए की सुपारी देकर बदमाशों से महंत देवानंद की हत्या करवाई थी।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हत्या का कारण मठ की कार्यकारिणी की मान्यता को लेकर था। दरअसल देवानंद महाराज द्वारा मठ की नई कार्यकारिणी का गठन करके कानूनी रुप से मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रयास शुरू किया गया जिस पर पुरानी कार्यकारिणी द्वारा न्यायालय में नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता नहीं देने की आपत्ति दर्ज कराई।
पुरानी कार्यकारिणी की तरफ से कानूनी लड़ाई अधिवक्ता संतोष राय द्वारा शुरू की और संतोष राय ने स्वयं को पुरानी कार्यकारिणी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया। संतोष राय चंद्रेसल चैरिटेबल ट्रस्ट का संचालन स्वयं करना चाहता था और मठ की कार्यकारिणी में धीरे धीरे स्वयं के लोगों को प्रवेश दिलवाकर मठ की जमीन, मठ के खातों में जमा करोडों रुपयों को हड़पना चाहता था।
उन्होंने बताया कि संतोष राय ने देवानंद महाराज को अपने रास्ते से हटाने के लिए आदित्य वर्मा नाम के बदमाश को योजना में शामिल किया। संतोष राय ने आदित्य वर्मा को एक लाख रुपए में देवानंद महाराज की हत्या करने के लिए तैयार किया। आदित्य वर्मा ने देवानंद महाराज की हत्या करने की योजना में अंकित बैरवा, पुष्पेन्द्र सिहं उर्फ प्रिंस एवं अन्य एक साथी को शामिल किया।
पांच जून को आदित्य वर्मा अपने साथियों अंकित बैरवा, पुष्पेन्द्र सिहं उर्फ प्रिंस एवं अन्य एक साथी के साथ रात में चाकू लेकर मठ गया और योजनाबद्ध तरीके से नंदनवन महाराज के कमरे की बाहर से कुन्दी लगाकर देवानंद महाराज के कमरे में प्रवेश कर सोते हुए देवानंद महाराज पर चाकुओं से गोद दिया।



