राजस्थान की मशहूर मांड गायिका गवरी देवी का निधन

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बाड़मेर/जयपुर। राजस्थान की मशहूर मांड गायिका गवरी देवी का निधन हो गया। वह करीब 98 वर्ष की थी। उन्होंने गुरुवार रात अंतिम सांस ली।

गवरी देवी कई दशकों तक मांड गायकी के क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाई। वह अपनी बहू सुंदरदेवी और पौत्री नीतू को विरासत में मांड गायकी सौंप कर गई हैं। गवरी का बाड़मेर जिले के कोरण गांव में जन्म हुआ और लोक कलाकार उनके माता-पिता से उन्होंने मांड गायकी सीखी। पाली में उनके नाम से बसे गवरी नगर में वह रहती थीं।

उनके कार्यक्रम दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर कार्यक्रम प्रसारित होते थे। जीवनकाल में उन्हें जवाहर कला केंद्र, दूरदर्शन और वीर दुर्गादास राठौड़ लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिले थे। गवरी के निधन पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि पाली की सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनका जाना लोक संगीत जगत एवं राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।

शर्मा ने कहा कि अपनी मधुर स्वर साधना और लोकगीतों के माध्यम से उन्होंने राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पहचान दी। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी सुरमयी विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों और उनके प्रशंसकों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुप्रसिद्ध गायिका गवरी के निधन पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त की और कहा कि अनेक दशकों तक उन्होंने मांड गायन किया तथा इस लोककला का पर्याय बनीं। उनके निधन से राजस्थान के कला एवं संस्कृति क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को धैर्य तथा संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।