नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने प्रधानमंत्री कार्यालय के पास स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड से बेदखली के मामले में सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश धीरेंद्र राणा सरकार के बेदखली के आदेश के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर शनिवार को सुनवाई की।
राजधानी के रेस कोर्स इलाके में प्रधानमंत्री कार्यालय के पास स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को केंद्र सरकार ने अपने कब्ज़े में ले लिया है। सरकार ने इसके द्वार पर एक नोटिस चस्पा दिया है, जिसमें इसे सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। सरकार ने नोटिस में किसी भी अनधिकृत कब्ज़े या अतिक्रमण के खिलाफ चेतावनी दी है।
इंडियन पोलो एसोसिएशन ने पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्ज़ा करने वालों को बेदखल करना) कानून, 1971 की धारा 9(3) के तहत याचिका दाखिल की थी, जिसमें 20 मई, 2026 के बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने अपील और रोक लगाने की अर्ज़ी दोनों पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
अपीलकर्ता ने सुनवाई टालने का विरोध किया और अनुरोध किया कि अगली सुनवाई तक प्रतिवादी को बेदखली आदेश को लागू करने से रोका जाए, क्योंकि ऐसा न करने पर अपील बेअसर हो जाएगी। दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि अपील तीन को दायर की गई थी और पहले कोई अंतरिम रोक नहीं दी गई थी।
अदालत ने यह भी देखा कि इंडियन पोलो एसोसिएशन ने रिट याचिका (सिविल) नंबर 8112/2026 के ज़रिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, जहां इसी तरह की अंतरिम राहत की मांग को ठुकरा दिया गया था। उच्च न्यायालय ने आठ जून को याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया था कि रोक लगाने की अर्ज़ी पर पटियाला हाउस कोर्ट के ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा निर्णय लिया जाए, और यह भी कहा था कि 12 जून तक बेदखली आदेश को तुरंत लागू करने की कोई संभावना नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि रोक लगाने की अर्ज़ी सुनवाई के दिन ही दायर की गई थी और प्रतिवादी को इसकी अग्रिम प्रति नहीं दी गई थी, इसलिए तुरंत दलीलें नहीं सुनी जा सकती थीं क्योंकि प्रतिवादी को जवाब दाखिल करने का अधिकार था। अगली सुनवाई की तारीख तक बेदखली आदेश के कार्यान्वयन को रोकने के अनुरोध को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि इसी तरह के अनुरोध पहले भी प्रधान ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश, पटियाला हाउस अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष किए गए थे, लेकिन कोई राहत नहीं दी गई थी।
न्यायिक अनुशासन और औचित्य का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि वह विवादित आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। अंतरिम सुरक्षा देने से अदालत के इनकार के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की और इमारत का कब्ज़ा अपने नियंत्रण में ले लिया। अदालत ने भारत सरकार को अपील और रोक लगाने की अर्ज़ी पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और आदेश दिया कि अपीलकर्ता के वकील को अग्रिम प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं। अब यह मामला 17 जून को आगे की सुनवाई के लिए अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।



