विजय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी मामले में द्रमुक नेता अनिता राधाकृष्णन अरेस्ट

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चेन्नई। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कद्दावर नेता और विधायक अनिता आर राधाकृष्णन को मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में शुक्रवार को थूथुकुडी जिले के आतुर में गिरफ्तार कर लिया गया।

यह गिरफ्तारी मद्रास हाईकोटग् द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में श्री राधाकृष्णन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किये जाने के कुछ ही घंटों के भीतर हुई है, जिससे राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।

विधायक को आतुर टाउन पंचायत में एक निरीक्षण के दौरान गिरफ्तार किया गया। इस दौरान कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही क्योंकि द्रमुक कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी का विरोध किया और पुलिस वाहन को रोकने का प्रयास किया। सात बार के विधायक राधाकृष्णन विधानसभा में तिरुचेंदूर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विपक्षी द्रमुक के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही यह गिरफ्तारी द्रमुक के किसी बड़े नेता की पहली गिरफ्तारी है, जो यह संकेत देती है कि तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) सरकार कड़ा रुख अपनाने के लिए तैयार है। यह कार्रवाई विधायकों के खरीद-फरोख्त के प्रयास के आरोप में हुई गिरफ्तारियों के ठीक बाद हुई है, जिसमें द्रमुक द्वारा सत्तारूढ़ टीवीके के एक विधायक को पाला बदलने के लिए रिश्वत देने का प्रयास किया गया था। इस मामले में भी पुलिस द्रमुक के पूर्व मंत्री वी सेंथिल बालाजी की तलाश कर रही है।

गौरतलब है कि पुलिस ने राधाकृष्णन के खिलाफ 20 जून को तिरुचेंदूर में दिवंगत द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक जनसभा में अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। यह प्राथमिकी आतुर टीवीके पदाधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर की गई थी।

इससे पहले, जब उनकी अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई के लिए आयी, तो न्यायमूर्ति जी के इलंदिरैयन ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत भाषण की प्रतिलिपि को पढ़ने के बाद इसे खारिज कर दिया और राधाकृष्णन द्वारा की गई टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। न्यायाधीश ने पूछा कि एक पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह के अपमानजनक तरीके से कैसे बात कर सकते हैं।

न्यायाधीश ने पूछा कि वह कोई आम आदमी नहीं हैं। क्या उन्हें मुख्यमंत्री के पद का सम्मान नहीं करना चाहिए? अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत की राहत देने का कोई कारण नहीं दिखता।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि यदि भाषण अपमानजनक था भी, तो भी इसमें वे अपराध लागू नहीं होते जिनके तहत पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता पर अपने भाषण के माध्यम से विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी पैदा करने का प्रयास करने का मामला दर्ज किया गया है, जबकि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई इरादा प्रकट नहीं होता है।

सरकारी वकील ने हालांकि तर्क दिया कि यदि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज न की होती, तो पूर्व मंत्री की टिप्पणियां टीवीके और द्रमुक समर्थकों के बीच टकराव में बदल सकती थीं। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि एक सात बार के विधायक से मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह से बात करने की उम्मीद नहीं की जाती है।