अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा : वसुन्धरा राजे

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जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा है कि अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा है।

राजे बुधवार को यहां राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पर आयोजित अमृत महोत्सव कार्यक्रम के एक सत्र में बोल रही थी। उन्होंने सदन में बढ़ते अमर्यादित आचरण और भाषा के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले जब विधायक पूरी तैयारी और अध्ययन करके आते थे, तो उन्हें सुनने के लिए सदन भरा रहता था और नए सदस्य उनसे सीखते थे, लेकिन दुर्भाग्य से आज के कई नये विधायक बिना पढ़े और बिना तैयारी के सदन में आ रहे हैं, जिससे चर्चा का स्तर प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जब सर्वश्री गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, सीपी जोशी, प्रद्युम्न सिंह, घनश्याम तिवाड़ी, डॉ.नाथू सिंह गुर्जर, राजपाल शेखावत जैसे नेता तर्क के साथ बोलते थे तो पूरा सदन सुनता था पर आज ऐसा नहीं है। उन्होंने राव राजेंद्र सिंह, काली चरण सराफ़ एवं बीडी कल्ला को भी अच्छा वक्ता बताया।

उन्होंने कहा कि भैरों सिंह शेखावत का व्यवहार हरिदेव जोशी से सिकंदर-पोरस जैसा था। सिकंदर ने पोरस को हराने के बाद भी उसके साथ एक शासक जैसा व्यवहार किया। जिनेवा में पाकिस्तान द्वारा पेश किए मानवाधिकार हनन को रोकने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने अटल बिहारी वाजपेयी को भेजा था, पर अब राजनीति में प्रतिशोध है। भाषाई स्तर गिरा है।

उन्होंने कहा कि पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, चौबीस घंटे घरेलू बिजली, ईआरसीपी, नदी से जोड़ने की योजना और सर्व श्रेष्ठ विधायक का चयन उनकी सरकार के निर्णय थे।