जयपुर। अधिवक्ता परिषद राजस्थान जयपुर प्रांत एवं आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) जयपुर बैंच इकाई के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘साइबर अपराध एवं जागरूकता’ विषय पर विशेष स्टडी सर्किल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिवक्ताओं और विधि विद्यार्थियों को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना तथा उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) रानू शर्मा थीं। उनके साथ पुलिस कमिश्नरेट स्थित कंप्यूटर सपोर्ट सेंटर (सीएससी) की विशेषज्ञ टीम ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूपों और सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। टीम ने फिशिंग, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, रैंसमवेयर, साइबर स्टॉकिंग सहित विभिन्न ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों से अवगत कराते हुए इनसे बचाव के प्रभावी उपाय बताए।
एडीसीपी रानू शर्मा ने कहा कि साइबर अपराधों के अधिकांश पीड़ित सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की चिंता के कारण घटना की जानकारी छिपा लेते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यदि लोग अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, ओटीपी और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें तथा डिजिटल सतर्कता बरतें, तो अधिकांश साइबर ठगी की घटनाओं को रोका जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने तथा राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल का उपयोग करने की सलाह दी। वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ता समाज का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए साइबर कानूनों और डिजिटल सुरक्षा की जानकारी उनके माध्यम से आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती है।
इस अवसर पर अधिवक्ता परिषद राजस्थान के प्रांत अध्यक्ष प्यारे लाल ने एडीसीपी रानू शर्मा का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। एएफटी में इंटर्नशिप कर रहे विधि विद्यार्थियों ने भी स्टडी सर्किल में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में अधिवक्ता परिषद के प्रांत महामंत्री अभिषेक सिंह ने राजस्थान पुलिस की इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए भविष्य में विभिन्न न्यायालयों में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का भरोसा दिलाया। स्टडी सर्किल का समापन साइबर सुरक्षा की शपथ और समाज में डिजिटल जागरूकता फैलाने के संकल्प के साथ हुआ।



