सिरोही के दो नेताओं की जंग में पिसा अधिकारी

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सिरोही भाजपा में नेताओं की वर्चस्व की लड़ाई में पिस रहे अधिकरी

सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही भाजपा में पिछले चैबीस घंटों से ये चर्चा गर्म है कि यहां के दो नेता एक दूसरे का नीचा दिखाने और पटखनी देने के लिए हर स्तर पर आ चुके हैं। वर्चस्व की ये लडाई अब पिण्डवाडा विधानसभा क्षेत्र में चरम पर पहुंच चुकी है। सिरोही विधानसभा में भी ये खींचतान है। लेकिन, ये कभी इस तरह से सामने नहीं आई जिस तरह से पिण्डवाडा विधानसभा में आई है। जिले के दो नेताओं की तकरार में अधिकारियों और कार्मिकों पर गाज गिर रही है।

– एक दूसरे की लकीर काटने की कोशिश

जिस ताजा घटनाक्रम की चर्चा है उसके अनुसार दो नेताओं के बीच में सरूपगंज की एक पोस्ट को लेकर जोर आजमाईश चल रही थी। स्थानीय नेता ने यहां पर अपना करीबी अधिकारी तैनात करवा दिया। जबकि दूसरे नेता यहां पर अपनी जाति के अधिकारी को लगाने के इच्छुक थे। दो दिन पहले स्थानीय नेता के करीबी अधिकारी का सरूपगंज में पोस्टिंग का आॅर्डर सिरोही के आला अधिकारी ने किया था। दूसरे नेता को ये नागवार गुजरा। दो दिन पहले जोधपुर में संगठन की बैठक हुई। इसमें भाग लेने के लिए दोनों नेता वहां गए। संगठन में चर्चा ये है कि इसी दौरान राष्ट्रीय राजधानी वो नेता ने जोधपुर स्थित अधिकारी से मिलकर सिंगल ऑर्डर निकलवाकर स्थानीय नेताजी के करीबी अधिकारी को जिले से ही बाहर भिजवा दिया। जिले की तीनों विधानसभाओं में इन नेता जी के हस्तक्षेप के कारण इनकी जगह पर चुने हुए पुराने नेता जिले के सभी भाजपाइयों को याद आने लगे हैं।

– पहले यहां हुआ था

ऐसा पहली बार हुआ है ये नहीं है। दरअसल राष्ट्रीय राजधानी वाले नेता के जिले से पांव उखाडने के लिए राज्य राजधानी से राजनीति चलाने वाले नेताओं को गठबंधन जिला स्तर पर चल रहा है। सिरोही विधानसभा के नेता भी इस गठबंधन का हिस्सा बताए जाते हैं। कुछ महीने पहले एक स्थानांतरण माउण्ट आबू में हुआ था। जब सिरोही के दो नेताओं को और पिण्डवाडा के स्थानीय नेता को ये पता चला कि ये राष्ट्रीय राजधानी वाले नेताजी के कहने पर हुआ है और ये नेता पिण्डवाडा विधानसभा के नेता के वर्चस्व को चुनौति दे रहे हैं तो उनका स्वाभिमान जाग गया। पार्टी के सूत्रों की मानें तो विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था। ऐसे में सिरोही के दो और पिण्डवाडा के एक नेता जयपुर में एक साथ बैठे और मंत्री को उस कार्मिक को हटाने का पत्र दिया। ज्वाइन करने के चैबीस घंटे में माउण्ट आबू से वो अधिकारी हट गया।