नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को आश्वासन दिया कि वह छात्रों की सुरक्षा और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की शुचिता बनाए रखने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।
यह आश्वासन न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष इस वर्ष कथित नीट प्रश्न पत्र लीक से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी और मजबूत सुधारों को लागू किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि हम इस पर नजर रखेंगे। सब कुछ सुव्यवस्थित हो, यह सुनिश्चित करने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार नीट पेपर लीक मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और उच्चतम कार्यकारी स्तर की देखरेख में छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए 10 कदम आगे बढ़कर काम कर रही है।
अदालत ने कहा कि इस तरह की समस्याओं को बिना स्थायी समाधान के नहीं छोड़ा जा सकता। पीठ ने केंद्र से विस्तृत हलफनामा मांगते हुए मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी। ये याचिकाएं बड़े पैमाने पर पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने के बाद दायर की गई थीं।
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसका ध्यान अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी संस्थागत सुधारों पर है। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को सूचित किया कि सरकार ने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और वह जल्द ही एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करेगी, जिसमें प्रिंटिंग से लेकर परीक्षा केंद्रों तक वितरण प्रक्रिया की सुरक्षा से जुड़े सुधार शामिल होंगे।
पीठ ने नीट को कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) में स्थानांतरित करने की व्यावहारिकता, साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के उपायों पर भी विवरण मांगा। अदालत ने कहा कि वह पूरे वर्ष इन सुधारों के कार्यान्वयन की बारीकी से निगरानी करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई को होगी।



