स्वबोध-शत्रुबोध की गूंज के साथ गुरुपूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन

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अजमेर। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के सभागार में मंगलवार भक्ति, ज्ञान और राष्ट्रजागरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। हिन्दू जनजागृति समिति के तत्वावधान में आयोजित ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव 2026’ में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह महोत्सव एक साथ देशभर के 64 स्थानों पर एक ही समय पर संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत श्री व्यासपूजन और परब्रह्म भक्तराज महाराज के प्रतिमा पूजन से हुई। इसके बाद सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले के प्रेरणादायी संदेश का वाचन हुआ। पूरे सभागार ने रामराज्य की स्थापना का संकल्प लिया और सामूहिक नामजप से वातावरण गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में लगी ग्रंथ-प्रदर्शनी और राष्ट्र-धर्म विषयक फ्लेक्स प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

मंच से स्व-रक्षा की आसान तकनीकों का चलचित्र प्रस्तुत किया गया। साथ ही आगामी समय की चुनौतियों को देखते हुए समिति ने हिन्दू समाज को धर्मशिक्षा और स्वरक्षा प्रशिक्षण देने की घोषणा की। सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले के समाजकार्य पर आधारित प्रेरणादायी लघुचित्रपट को देखकर लोगो में भाव जागृत हुआ


राम भारत की आत्मा और चेतना : मनोज बेहरवाल

इस अवसर पर मुख्य वक्ता सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य मनोज बेहरवाल ने प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा की परिवार में स्वयं से बड़ों का आदर करना भी धर्म है। सभी को प्रभु श्रीराम के जीवन से पुत्रधर्म, पिताधर्म, भाईधर्म और राजा का धर्म सीख उसे आचरण में लाएं। उन्होंने कहा कि भगवान राम अधिकार और कर्तव्य परायणता का अनुपम उदाहरण है। राजतिलक के दिन वनवास की आज्ञा का पालन, राम के साथ पत्नी सीता, भाई भरत और लक्ष्मण की जिद कर्तव्य पालन की मिसाल है। राम का संपूर्ण जीवन धर्म, मर्यादा और आदशों से भरा रहा। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के अपने कर्तव्यों का पालन किया। लोक कल्याण की भावना के कारण ही हम आज भी रामराज्य की कल्पना करते हैं। माता शबरी के यहां बेर खाना स्पष्ट करता है राम सामाजिक समरसता के भी प्रतीक रहे। राम भारत की आत्मा और चेतना है। अपनी मातृभूमि के प्रति अगाढ प्रेम का राम से बढकर कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। सोने की लंका भी राम के मातृभूमि प्रेम से नहीं डिगा सकी। छात्रों को भी मैनेजमेंट कांसेप्ट और लीडरशिप के अनेक गुण सीखने चाहिए।

स्वबोध और शत्रुबोध का ज्ञान परमावश्यक : जखोटिया

हिन्दू जनजागृति समिति के आनंद जखोटिया ने कहा कि आज के समय में प्रत्येक हिन्दू को अपना ‘स्वबोध’ यानी अपनी शक्ति और धर्मज्ञान तथा ‘शत्रुबोध’ यानी शत्रु की छिपी रणनीति को पहचानना आवश्यक है। उन्होंने आह्वान किया कि देश-धर्म रक्षण के लिए अब प्रत्येक व्यक्ति को कृतीशील होना होगा। कार्यक्रम में विश्व हिन्दुू परिषद के अखिल भारतीय पदाधिकारी आनंद गोयल, आनंद अग्रवाल, सेवानिवृत्त न्यायाधीश किशन कुमार, मोहन खंडेलवाल, एडवोकेट शशिप्रकाश इंदौरिया, ओम खंडेलवाल, कश्मीर सिंह जैसे समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।