बेंगलूरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को मंत्रिमंडल विस्तार करते हुए उसमें शामिल 19 मंत्रियों को विभागों का आवंटन किया। इसके साथ ही विधानसभा सत्र से पहले महत्वपूर्ण विभागों के बंटवारे को लेकर कई दिनों से जारी अटकलों पर विराम लग गया।
कर्नाटक में लंबे समय से प्रतीक्षित विभागों का आवंटन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई मंत्री महत्वपूर्ण विभाग मिलने को लेकर नजरें टिकाए हुए थे, वहीं विभागों विभागों की पसंद को लेकर मंत्रिमंडल के भीतर संभावित खींचतान की खबरें भी सामने आ रही थीं।
सरकार इस प्रक्रिया को विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही पूरा करने के लिए उत्सुक थी, ताकि सभी नवनियुक्त मंत्री समय पर अपने-अपने विभागों का प्रभार संभाल सकें और सदन के पटल पर विपक्ष का मजबूती से सामना कर सकें।
विभागों के आवंटन में हुई देरी के कारण सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं। मुख्य चिंता इस बात को लेकर थी कि महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां किसे सौंपी जाएंगी और क्या यह बंटवारा नए मंत्रियों की अपेक्षाओं को पूरा कर पाएगा।
अब जबकि विभागों का बंटवारा अंतिम रूप ले चुका है, सारा ध्यान विस्तारित मंत्रिमंडल के प्रशासनिक प्रदर्शन और विधानसभा के भीतर सरकार का बचाव करने की उसकी क्षमता पर टिक गया है।
नवनियुक्त मंत्रियों से अब यह उम्मीद की जाएगी कि वे अपने विभागों से जुड़े मुद्दों पर सवालों के सटीक जवाब दें, विपक्ष के हमलों का करारा जवाब दें और प्रमुख नीतिगत व प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट रूप से रखें।
शिवकुमार सरकार अब पूर्ण गठित मंत्रिमंडल के साथ विधानसभा सत्र में उतरेगी, जहां विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष द्वारा सरकार को घेरने की पूरी संभावना है। असली परीक्षा हालांकि विधानसभा के पटल पर होगी, जहां नए मंत्रियों को यह साबित करना होगा कि यह राजनीतिक पुनर्गठन जमीनी स्तर पर बेहतर और प्रभावी शासन में बदल सकता है।



