किशोर मारणे हत्याकांड : आखिरी आरोपी को 12 साल बाद जमानत

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पुणे। बंबई हाई कोर्ट ने 2010 में किशोर मारणे की हत्या के मामले में जेल में बंद आखिरी आरोपी दीपक गुलाब भटांब्रेकर को जमानत दे दी है। इस हत्याकांड के बाद पुणे के अपराध जगत में गैंगस्टर शरद मोहोळ का नाम प्रमुखता से सामने आया था।

न्यायमूर्ति एमएस कर्णिक और न्यायमूर्ति संदीप डी पाटील की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। भटांब्रेकर समेत सात आरोपियों को जनवरी 2010 में पुणे के नीलायम थिएटर के पास एक होटल में मारणे की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। भटांब्रेकर को उसी महीने गिरफ्तार किया गया था और वह करीब 12 वर्ष तक जेल में रहा।

भटांब्रेकर की ओर से अधिवक्ता सत्यम हर्षद निंबालकर ने दलील दी कि सुनवाई के दौरान किसी भी स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया और सीसीटीवी फुटेज भी अभियोजन के दावे की पुष्टि नहीं करती।

उच्च न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि भटांब्रेकर की अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई होने की संभावना नहीं है। अदालत ने यह भी देखा कि पहले जमानत पर बाहर रहने के दौरान उसने जमानत की शर्तों का दुरुपयोग नहीं किया था।

न्यायालय ने यह भी कहा कि मामले के सभी छह सह-आरोपियों, जिनमें शरद मोहोळ भी शामिल था, को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसके आधार पर भटांब्रेकर को भी समान राहत दी गई।

शरद मोहोळ किशोर मारणे हत्याकांड के बाद पुणे के प्रमुख गैंगस्टरों में शामिल हो गया था। जनवरी 2024 में कोथरूड में अज्ञात हमलावरों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने उसकी हत्या के पीछे गैंग के भीतर का विवाद होने की आशंका जतायी थी।