मुंबई। भारतीय जनता पार्टी अपने सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय यानी संसदीय बोर्ड का पुनर्गठन करने जा रही है, जिसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शामिल किये जाने की अटकलें तेज हो गई हैं, हालांकि उन्होंने बार-बार कहा है कि उनकी नई दिल्ली जाने की कोई योजना नहीं है और वे महाराष्ट्र में ही काम करते रहना चाहते हैं।
भाजपा के राजनीतिक हलकों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में फडणवीस को संगठन की कोई अहम जिम्मेदारी सौंपने पर चर्चा चल रही है। केंद्रीय कैबिनेट में तुरंत शामिल होने की बजाय उनके भाजपा के संसदीय बोर्ड में शामिल होने की संभावना को राष्ट्रीय राजनीति में उनके प्रवेश का एक संभावित रास्ता माना जा रहा है।
ये अटकलें नितिन नबीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और उनके नेतृत्व में नयी संगठनात्मक टीम के गठन के ठीक बाद शुरू हुई हैं। अब ध्यान पार्टी के फैसले लेने वाले संसदीय बोर्ड जैसी अहम संस्थाओं के संभावित पुनर्गठन पर केंद्रित हो गया है।
सूत्रों का कहना है कि फडणवीस को पुनर्गठित संसदीय बोर्ड में शामिल किया जा सकता है। उनकी इस संभावित प्रोन्नत्ति को पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव को दिये जा रहे बढ़ते महत्व के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा संसदीय बोर्ड में पार्टी अध्यक्ष और 11 अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होते हैं। इसमें अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। यह संस्था पार्टी की रणनीति और नेतृत्व से जुड़े अहम संगठनात्मक और राजनीतिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर उन्हें शामिल किया जाता है, तो भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में फडणवीस का कद काफी बढ़ जाएगा और उन्हें केंद्रीय स्तर पर बड़े राजनीतिक फैसले लेने में सीधी भूमिका मिलेगी।



