80 प्रतिशत से अधिक अशैक्षणिक कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी से MDSU का कामकाज ठप होने की आशंका

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अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में पहले से ही अशैक्षणिक कर्मचारियों की भारी कमी के बीच स्थानीय नगर निकाय चुनावों में विश्वविद्यालय के 80 प्रतिशत से अधिक अशैक्षणिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने से विश्वविद्यालय का संपूर्ण प्रशासनिक, परीक्षा एवं छात्र सेवा कार्य लगभग ठप होने की गंभीर आशंका उत्पन्न हो गई है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग तथा संभागीय आयुक्त को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के समस्त अशैक्षणिक कर्मचारियों को स्थानीय नगर निकाय चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कुलगुरु ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय पहले से ही सीमित अशैक्षणिक कर्मचारियों के सहारे अपने परीक्षा, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों का संचालन कर रहा है। ऐसे में उपलब्ध कर्मचारियों में से 80 प्रतिशत से अधिक को चुनाव ड्यूटी पर भेज दिया जाता है तो विश्वविद्यालय के परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, अंक प्रविष्टि, परीक्षा परिणाम तैयार करने एवं समयबद्ध रूप से परिणाम घोषित करने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में परीक्षाओं की तैयारियां, सेमेस्टर परीक्षाओं का संचालन तथा परीक्षा परिणामों से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। कर्मचारियों की इतनी बड़ी संख्या के चुनाव ड्यूटी पर चले जाने से इन कार्यों में भारी व्यवधान उत्पन्न होगा, जिसका सीधा खामियाजा हजारों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा। परिणामों में देरी होने से विद्यार्थियों के अगले सेमेस्टर, प्रवेश, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं एवं अन्य शैक्षणिक अवसरों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

कुलगुरु ने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी अंकतालिका, उपाधि, प्रमाण-पत्र, परीक्षा संबंधी समस्याओं, नामांकन, दस्तावेज सत्यापन तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आते हैं। यदि अशैक्षणिक कर्मचारी चुनाव ड्यूटी पर चले जाते हैं तो इन आवश्यक छात्र सेवाओं का संचालन गंभीर रूप से बाधित होगा और विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों तथा बार-बार विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने के लिए विवश होना पड़ेगा।

पत्र में इस बात पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है कि कर्मचारियों की भारी कमी का प्रभाव विश्वविद्यालय में संचालित नियमित शैक्षणिक गतिविधियों एवं कक्षाओं पर भी पड़ेगा। विभागीय व्यवस्थाएं बाधित होने से कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे विद्यार्थियों को अनावश्यक सेमेस्टर विलंब का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के कार्यालयीन, वित्तीय, प्रशासनिक, अभिलेखीय एवं शासन स्तर से संबंधित समयबद्ध कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है।

कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा है कि यह स्थिति केवल विश्वविद्यालय की प्रशासनिक असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य, विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर तथा उसकी वैधानिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। सीमित स्टाफ के 80 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को एक साथ चुनाव ड्यूटी पर लगाए जाने की स्थिति में विश्वविद्यालय का सामान्य कामकाज लगभग पूर्णतया ठप हो सकता है।

उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग एवं संभागीय आयुक्त से आग्रह किया है कि विश्वविद्यालय की वास्तविक कार्मिक स्थिति और वर्तमान परीक्षा एवं शैक्षणिक आवश्यकताओं को गंभीरता से देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए तथा संबंधित अधिकारियों को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के समस्त अशैक्षणिक कर्मचारियों को स्थानीय नगर निकाय चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने के लिए आवश्यक निर्देश प्रदान किए जाएं।

कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय लोकतांत्रिक एवं निर्वाचन संबंधी दायित्वों के महत्व से पूर्णतः अवगत है, किंतु विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान के सीमित कार्मिक संसाधनों को देखते हुए ऐसा समाधान आवश्यक है, जिससे चुनावी कार्य भी प्रभावित न हों और हजारों विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विश्वविद्यालय के आवश्यक कार्य भी बाधित न हों।

कुलगुरु ने राज्य सरकार एवं प्रशासन से इस मामले में तत्काल और सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की है, ताकि विश्वविद्यालय के परीक्षा, शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्र सेवा संबंधी कार्यों को ठप होने से बचाया जा सके।