जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता की जांच कर रहे पैनल के पुनर्गठन की मांग, सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल

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नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई के संसद चलो मार्च के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसी कथित पुलिस बर्बरता की जांच के लिए गठित 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति के पुनर्गठन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष मंगलवार को दायर इस याचिका का उल्लेख करते हुए इसे अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए इसे अत्यंत शरारतपूर्ण बताया और इसके राजनीतिक रूप से प्रेरित होने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक मंच के रूप में नहीं किया जा सकता।

उन्होंने समिति के प्रस्तावित पुनर्गठन के संबंध में नामों के सुझाव दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। इस पहलू पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हम इस तरह से नामों का उल्लेख किए जाने को सराहा नहीं करते।

याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने स्पष्ट किया कि वे न तो मौजूदा समिति के किसी सदस्य का नाम ले रहे हैं और न ही पुनर्गठन की मांग करते समय कोई नया नाम प्रस्तावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर उनका सीमित अनुरोध केवल इतना है कि आवेदन को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

न्यायालय ने कहा कि इस आवेदन पर विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े मुद्दों से संबंधित मुख्य याचिकाओं के बैच के साथ ही सुनवाई की जाएगी। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 20 अगस्त को पूर्व न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति की घोषणा की थी।

न्यायमूर्ति रेड्डी के अलावा इस समिति में पूर्व मुख्य न्यायाधीश (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय) रवि शंकर झा, पूर्व न्यायाधीश (दिल्ली उच्च न्यायालय) जस्टिस शलिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और पूर्व पुलिस महानिदेशक (मेघालय) एलआर बिश्नोई शामिल हैं।

इस उच्च स्तरीय समिति को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, निगरानी और महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के आरोपों की जांच का काम सौंपा गया है। इसके साथ ही, समिति पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों, उन्हें आई चोटों और सार्वजनिक-निजी संपत्ति को पहुंचे नुकसान के जवाबी आरोपों की भी निष्पक्ष जांच करेगी।