भदेल के वार्ड में भाजपा फिर खाली हाथ, देवनानी के गढ़ में बची पार्टी की साख

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अजमेर। अजमेर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने नई राजनीतिक तस्वीर खड़ी कर दी है। 80 वार्डों वाले निगम में कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा 32 वार्डों में विजयी रही। वहीं 11 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारकर सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली है। बहुमत के लिए 41 सीटें चाहिए। यानी कांग्रेस 4 सीट दूर है। ऐसे में निगम में अगला बोर्ड किसके नेतृत्व में बनेगा, इसका फैसला फिलहाल निर्दलीयों के रुख पर निर्भर दिखाई दे रहा है।

सबसे अहम बात यह है कि जीतने वाले निर्दलीयों में बड़ी संख्या ऐसे प्रत्याशियों की है, जिन्हें भाजपा या कांग्रेस से टिकट नहीं मिला और उन्होंने बगावत कर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। पार्टी प्रत्याशियों को हराकर ये बागी अब सत्ता के गठन में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

35 साल के भाजपा वर्चस्व को चुनौती

अजमेर नगर निगम की राजनीति में लंबे समय से भाजपा का दबदबा रहा है। करीब 35 वर्षों से निगम की सत्ता पर भाजपा का प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार के परिणामों ने इस वर्चस्व को स्पष्ट चुनौती दी है। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसके साथ निर्दलीयों का गणित जुड़ता है तो भाजपा के लिए सत्ता बचाना आसान नहीं होगा।

अब कांग्रेस की नजर उन 11 निर्दलीय पार्षदों पर है, जबकि भाजपा भी अपने पुराने संपर्कों और संगठनात्मक प्रभाव के जरिए बहुमत का रास्ता तलाशने में जुट सकती है। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के बाद असली राजनीतिक खेल अब बोर्ड गठन को लेकर शुरू होने की संभावना है।

अनिता भदेल के वार्ड 45 में भाजपा का इंतजार बरकरार

अजमेर दक्षिण की विधायक अनिता भदेल के निवास वाले वार्ड 45 का परिणाम भाजपा के लिए खासा झटका माना जा रहा है। इस वार्ड में भाजपा पिछले करीब 25 वर्षों से जीत के लिए संघर्ष कर रही है। पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने यहां कांग्रेस के परंपरागत प्रभाव को जरूर तोड़ा था, लेकिन भाजपा अपना आधार मजबूत नहीं कर सकी।

इस बार वार्ड के आरक्षित होने के बाद भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी। विधायक अनिता भदेल भी पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय नजर आईं। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सके।

नतीजे ने एक राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है-क्या विधायक की व्यक्तिगत सक्रियता किसी वार्ड में पार्टी के संगठनात्मक समीकरण की भरपाई कर सकती है? वार्ड 45 का परिणाम फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ देता नजर आ रहा है।

देवनानी के वार्ड 4 में भाजपा ने बचाई लाज

इसके उलट अजमेर उत्तर में विधायक वासुदेव देवनानी के निवास वाले वार्ड 4 का परिणाम भाजपा के लिए राहत लेकर आया। चुनाव से पहले यह वार्ड हाईप्रोफाइल मुकाबले में बदल गया था।

भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेन्द्र गहलोत ने पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए अपनी पत्नी हेमा गहलोत को मैदान में उतारा। इस मुकाबले को देवनानी बनाम गहलोत खेमे की प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा था। कांग्रेस के समर्थन की चर्चा ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया था।

लेकिन अंतिम परिणाम भाजपा के पक्ष में गया। भाजपा प्रत्याशी की जीत ने न केवल देवनानी के प्रभाव को बरकरार रखा, बल्कि पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठित वार्ड भी बचा लिया।

बोर्ड गठन के लिए अब नजर निर्दलीयों पर

अजमेर निगम चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू 11 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत है। इनमें भाजपा और कांग्रेस के बागी भी शामिल हैं। इनकी भूमिका अब सिर्फ पार्षद तक सीमित नहीं रह सकती, क्योंकि बोर्ड गठन में इनके समर्थन के बिना किसी भी दल के लिए बहुमत का आंकड़ा हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की असली परीक्षा संगठन से ज्यादा सियासी जोड़-तोड़ और निर्दलीयों को अपने पक्ष में लाने की रणनीति की होगी।

कुल मिलाकर अजमेर नगर निगम का चुनाव परिणाम भाजपा के लंबे वर्चस्व में सेंध और कांग्रेस की वापसी की संभावना का संकेत दे रहा है। वहीं वार्ड 45 में भाजपा की हार और वार्ड 4 में जीत ने शहर की राजनीति में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने रख दी हैं। अब यह देखना अहम होगा कि 11 निर्दलीय किस खेमे का साथ देते हैं और अजमेर नगर निगम की सत्ता की चाबी आखिर किसके हाथ लगती है।

अजमेर नगर निगम चुनाव : 80 वार्डों के परिणाम, कौन कहां से जीता