शिक्षा बजट और स्कूल ग्रांट को लेकर एबीआरएसएम ने राज्य परियोजना निदेशक से की चर्चा

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समय पर ग्रांट जारी करने, स्वच्छता बजट बढ़ाने और शिक्षा संकुल की व्यवस्थाएं सुधारने की उठी मांग
जयपुर। विद्यालयों को मिलने वाली विभिन्न ग्रांट समय पर जारी करने, स्वच्छता मद का बजट बढ़ाने और शिक्षा संकुल भवन के रखरखाव समेत शिक्षा विभाग से जुड़े कई मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (स्कूल शिक्षा) के प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की राज्य परियोजना निदेशक रश्मि शर्मा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालयों के स्तर पर आ रही व्यावहारिक समस्याओं से उन्हें अवगत कराया।

प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में हुई वार्ता में स्कूल ग्रांट, पुस्तकालय ग्रांट, डिजिटल शिक्षा सहित विभिन्न मदों में मिलने वाली राशि समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। पुष्करणा ने कहा कि ग्रांट जारी होने में देरी का सीधा असर विद्यालयों की शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ता है।

स्वच्छता बजट बढ़ाने की मांग

संगठन के अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल ने कंपोजिट स्कूल ग्रांट में होने वाली देरी से विद्यालयों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूलों को स्वच्छता मद में मिलने वाली राशि मौजूदा जरूरतों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने राज्य सरकार को बजट में वृद्धि का प्रस्ताव भेजने का सुझाव दिया।

शिक्षा संकुल की दीवारों और अग्निशमन व्यवस्था का मुद्दा

प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर स्थित शिक्षा संकुल भवन के रखरखाव से संबंधित समस्याएं भी राज्य परियोजना निदेशक के समक्ष रखीं। भवन की दीवारों में उग आए पीपल और बरगद के पेड़ों को हटाने की मांग की गई, क्योंकि इनकी जड़ों से दीवारों को नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही कई स्थानों पर उखड़ी टाइल्स को दोबारा लगाने और भवन की अग्निशमन व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग भी की गई।

बंद कैंटीन को फिर शुरू करने का सुझाव

शिक्षा संकुल में लंबे समय से बंद स्टाफ कैंटीन को दोबारा शुरू करने का मुद्दा भी वार्ता में उठा। संगठन पदाधिकारियों ने इसके संचालन के लिए सरस डेयरी के साथ एमओयू किए जाने का सुझाव दिया। राज्य परियोजना निदेशक रश्मि शर्मा ने इस सुझाव पर सहमति जताई।

बार-बार वीसी से विद्यालय प्रबंधन प्रभावित होने का मुद्दा

प्रदेशाध्यक्ष पुष्करणा ने समग्र शिक्षा अभियान की वर्षभर की गतिविधियों के लिए वार्षिक कैलेंडर जारी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने समसा की ओर से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए महीने में दो दिन निर्धारित करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि बार-बार होने वाली वीसी के कारण विद्यालयों का नियमित प्रबंधन और शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। प्रतिनिधिमंडल ने शाला दर्पण पर पहले से उपलब्ध सूचनाओं की हार्ड कॉपी बार-बार विद्यालयों से मांगने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाने की मांग की।

पुरानी आईसीटी लैब और निर्माण कार्यों पर भी चर्चा

शिक्षक नेताओं ने आईसीटी के प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण के तहत स्थापित पुरानी हो चुकी कंप्यूटर लैब के निस्तारण की मांग रखी। इसके अलावा मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना के तहत होने वाले निर्माण कार्य विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से ही करवाने का सुझाव भी दिया गया।

पीएमश्री स्कूलों के लिए राशि स्वीकृत

राज्य परियोजना निदेशक रश्मि शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि करीब 300 पीएमश्री विद्यालय भवनों के लिए प्रति विद्यालय 1.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। वहीं पीएमश्री विद्यालयों के सौंदर्यीकरण के लिए प्रति विद्यालय 1 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने संगठन पदाधिकारियों से विद्यालय प्रधानाचार्यों को भारत सरकार के प्रबंध पोर्टल पर खर्च की गई राशि का तत्काल इंद्राज करने के लिए प्रेरित करने में सहयोग देने का आग्रह किया।

वार्ता के अंत में प्रतिनिधिमंडल की ओर से संगठन का साहित्य राज्य परियोजना निदेशक को भेंट किया गया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल, जिला कोषाध्यक्ष ग्यारसीलाल यादव, मीडिया प्रकोष्ठ सहसंयोजक जितेंद्र शर्मा, विमर्श कार्यशाला सदस्य योगेश उपाध्याय और हुकुम चंद मीणा शामिल रहे।