जयपुर। आमतौर पर अदालतों में अवकाश का मतलब तारीखों की फाइलें कुछ समय के लिए आराम और वकीलों को राहत माना जाता है, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट में इस बार छुट्टी का कैलेंडर जरूरी मामलों के सामने कुछ छोटा पड़ गया। रविवार 20 सितंबर और सोमवार 21 सितंबर के अवकाश के बीच अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष पीठों का गठन किया गया और रविवार रात तक न्यायिक कार्यवाही चलती रही।
निकाय चुनाव के बीच गिरफ्तारी की आशंका से जुड़े मामलों को लेकर याचिकाएं सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई का रास्ता खोला। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर विशेष पीठों का गठन हुआ। राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार जस्टिस अग्रवाल ने 7 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला है।
रात 10 बजे शुरू हुई सुनवाई
सबसे चर्चित मामलों में हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों की याचिका रही। जस्टिस नूपुर भाटी की एकलपीठ ने रविवार रात करीब 10 बजे सुनवाई शुरू की और कार्यवाही आधी रात के बाद तक चली। कोर्ट ने इन पार्षदों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई।
बीकानेर के वार्ड 18 से कांग्रेस पार्षद और पूर्व यूआईटी अध्यक्ष मकसूद अहमद की याचिका पर भी रविवार देर रात सुनवाई हुई। जस्टिस सुनील बेनीवाल ने रात करीब 11:15 बजे उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई और उन्हें 30 सितंबर को पूछताछ में शामिल होने के निर्देश दिए।
चुनावी गणित के बीच अदालत की दस्तक
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि राजस्थान के कई नगरीय निकायों में सोमवार को मेयर और अध्यक्ष पद के चुनाव होने थे। ऐसे में जिन पार्षदों ने गिरफ्तारी की आशंका जताई, उनके लिए समय बेहद महत्वपूर्ण था। अदालत ने अत्यावश्यकता को देखते हुए सामान्य अवकाश की प्रक्रिया से अलग तत्काल सुनवाई की व्यवस्था की।
रविवार को ही नागौर की कुचेरा नगरपालिका के पार्षद एवं पूर्व अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा और श्रीविजयनगर नगरपालिका के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुशील मिर्धा को भी अलग-अलग मामलों में अंतरिम राहत मिलने की जानकारी सामने आई।
छुट्टी थी, लेकिन अदालत की ‘ड्यूटी’ जारी रही
इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यही रही कि जब सरकारी कैलेंडर में अदालत के लिए अवकाश था, तब भी न्यायिक व्यवस्था ने अत्यावश्यक मामलों के लिए दरवाजे खोल दिए। चुनाव जैसे समयबद्ध लोकतांत्रिक कार्यक्रम के बीच गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में अदालत की तत्काल सुनवाई ने यह भी दिखाया कि न्यायिक प्रक्रिया में ‘जरूरी’ मामलों के लिए समय की बाधा हमेशा अंतिम नहीं होती।यानी इस बार राजस्थान हाईकोर्ट में छुट्टी जरूर थी, लेकिन न्याय का कामकाज छुट्टी पर नहीं गया।



