जयपुर। राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित अनियमितता के मामले में राज्य सरकार ने कंपनी को स्वीकृत विशेष आर्थिक रियायतों पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संज्ञान में मामला आने के बाद उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने कंपनी को दिए गए कस्टमाइज्ड पैकेज के तहत मिलने वाले परिलाभों को रोकने का निर्णय किया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड ‘अनंता’ ब्रांड के नाम से होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है। कंपनी को अलवर जिले के अजबगढ़ क्षेत्र में होटल-रिसॉर्ट परियोजना के लिए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) के तहत विशेष कस्टमाइज्ड पैकेज दिया गया था। इस पैकेज में निवेश से जुड़ी विभिन्न रियायतों और प्रोत्साहनों का प्रावधान था। रिपोर्टों में इस परियोजना के लिए न्यूनतम 115 करोड़ रुपये के निवेश का उल्लेख किया गया है।
आईएएस अधिकारी पर पद के दुरुपयोग के आरोप
मामला उस समय चर्चा में आया जब शिखर अग्रवाल पर आरोप लगे कि उन्होंने उदयपुर जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कथित तौर पर अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। आरोपों में रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट, आवश्यक प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के बिना स्वीकृतियां और विशेष आर्थिक पैकेज दिलाने जैसे बिंदु शामिल हैं।
इस मामले में एक और अहम पहलू उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल तथा उनके परिजनों के नाम पर विला खरीदे जाने का है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ विला कथित तौर पर बाजार मूल्य से कम कीमत पर खरीदे गए। यह भी बताया गया कि कंपनी को विशेष पैकेज जारी होने और विला की रजिस्ट्री की तारीख 27 मार्च 2026 एक ही थी। इन तथ्यों की जांच की जानी है।
एसीबी को भी मिली विस्तृत जांच की मंजूरी
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने प्रारंभिक स्तर पर सामने आए तथ्यों, उद्योग विभाग से मिली रिपोर्ट और मीडिया में प्रकाशित खबरों का परीक्षण करने के बाद मामले में प्राथमिक जांच दर्ज की है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच के लिए पूर्वानुमोदन भी प्रदान किया है। अब एसीबी अधिकारी, कंपनी के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल करेगी। स्वयं और परिजनों के नाम पर कथित रूप से अर्जित संपत्तियों के पहलू की भी जांच की जाएगी।



