डोटासरा से मांगा इस्तीफा, बोले-जिम्मेदारी तय होने तक जारी रहेगा विरोध
भीलवाड़ा। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के पार्टी सिंबल से जुड़े अथॉरिटी लेटर निर्धारित समय में निर्वाचन अधिकारी तक नहीं पहुंचने का मामला चुनाव खत्म होने के बाद भी पार्टी का पीछा नहीं छोड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य एवं पूर्व पार्षद मनोज पालीवाल ने अब इस मुद्दे को लेकर जिला कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से इस्तीफे की मांग करते हुए पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।
विवाद की शुरुआत 31 अगस्त को नगर निगम चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया के दौरान हुई थी। भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में कांग्रेस के 53 प्रत्याशियों के अधिकृत चुनाव चिह्न संबंधी दस्तावेज निर्धारित समय में निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंच गए थे, लेकिन 17 प्रत्याशियों के अथॉरिटी लेटर समय सीमा में जमा नहीं हो सके। इसके बाद इन प्रत्याशियों को कांग्रेस का अधिकृत चुनाव चिह्न नहीं मिल पाया। मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उसी समय निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर कई घंटे प्रदर्शन भी किया था।
मामला बाद में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ तक पहुंचा। संबंधित प्रत्याशियों की ओर से दायर 17 याचिकाओं को अदालत ने 8 सितंबर को खारिज कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस केवल 53 अधिकृत प्रत्याशियों के साथ चुनाव मैदान में रह गई।
पालीवाल इस प्रकरण को लेकर लगातार प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी पत्र भेजकर सिंबल वितरण की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इससे पहले उन्होंने गांधी प्रतिमा के सामने ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ कर डोटासरा के इस्तीफे की मांग भी की थी।
पालीवाल का आरोप है कि अधिकृत प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न समय पर पहुंचाना संगठन की जिम्मेदारी थी और इस चूक का खामियाजा पार्टी प्रत्याशियों तथा कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ा। उन्होंने चुनाव चिह्न संबंधी दस्तावेज भेजने और उन्हें निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि उनके आरोपों पर संबंधित प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा ने 70 में से 45 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 10 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। चुनाव परिणाम के बाद भी 17 प्रत्याशियों का सिंबल विवाद संगठन के भीतर राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। अब पालीवाल के धरने से यह प्रकरण एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के सामने आ गया है। उनकी मांग है कि पार्टी इस मामले की आंतरिक जांच कर यह स्पष्ट करे कि 17 अधिकृत प्रत्याशियों के दस्तावेज निर्धारित समय में निर्वाचन अधिकारी तक क्यों नहीं पहुंच सके और इसके लिए संगठन में किसकी जिम्मेदारी थी।



