नई दिल्ली। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) में नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह के कामकाज पर सवाल उठाते हुए ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता, द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता, पूर्व अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज और वरिष्ठ प्रशिक्षक एकजुट हुए हैं। शनिवार को नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में खेल जगत की इन हस्तियों ने भारतीय बॉक्सिंग के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए महासंघ में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लेने की मांग उठाई।
खेल हस्तियों ने महासंघ की कार्यप्रणाली, खिलाड़ियों के हितों, प्रशिक्षकों की भूमिका और संगठन के दीर्घकालिक विकास को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि भारतीय मुक्केबाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे ले जाने के लिए केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और स्पष्ट विकास योजना भी जरूरी है।
28 अक्टूबर की बैठक पर टिकी नजरें
महासंघ में जारी विवाद के बीच अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विचार के लिए 28 अक्टूबर को विशेष आम सभा की बैठक प्रस्तावित है। महासचिव प्रमोद कुमार की ओर से बुलाई गई इस बैठक में अध्यक्ष के नेतृत्व को लेकर फैसला किए जाने की मांग उठाई गई है।
प्रमोद कुमार के समर्थन में आए खेल जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि बैठक में महासंघ के अधिकृत सदस्यों को अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव पर निष्पक्ष विचार और महासंघ के संविधान के अनुरूप कार्यवाही की मांग की है।
प्रशासनिक फैसलों और पारदर्शिता पर सवाल
प्रमोद कुमार और उनका समर्थन कर रहे पक्ष महासंघ के कामकाज में कथित एकतरफा निर्णयों, वित्तीय पारदर्शिता, नियुक्तियों और खिलाड़ियों के चयन से जुड़े मामलों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य बॉक्सिंग संघों, प्रशिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिल रही है।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है और महासंघ के भीतर संबंधित पक्षों के बीच विवाद जारी है। ऐसे में इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच और संगठन के नियमों के अनुसार उनका समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अध्यक्ष और महासचिव के बीच बढ़ा टकराव
भारतीय बॉक्सिंग महासंघ का विवाद अध्यक्ष अजय सिंह और महासचिव प्रमोद कुमार के बीच अधिकारों को लेकर टकराव के रूप में भी सामने आया है। इससे पहले दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ निलंबन संबंधी आदेश जारी किए जाने की खबरें सामने आई थीं। दोनों पक्षों ने अपने-अपने कदमों के समर्थन में महासंघ के संविधान और प्रशासनिक अधिकारों का हवाला दिया है।
महासंघ के अध्यक्ष पक्ष ने विशेष आम सभा बुलाने की प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रमोद कुमार का पक्ष बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पर विचार कराने की मांग कर रहा है। इस विवाद का समाधान महासंघ के लागू संविधान, अधिकृत निकायों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना अहम होगा।
खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के हितों पर जोर
बैठक में शामिल खेल हस्तियों ने कहा कि महासंघ की प्राथमिकता खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, नियमित प्रतियोगिताएं, निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने जमीनी स्तर पर मुक्केबाजी को मजबूत करने और अनुभवी प्रशिक्षकों की भूमिका को महत्व देने की जरूरत भी बताई।
उनका मानना है कि राज्य संघों, पूर्व खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय से भारतीय मुक्केबाजी के विकास को गति मिल सकती है। इसके लिए दीर्घकालिक योजना और फैसलों में पारदर्शिता जरूरी है।
खेल मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील
प्रमोद कुमार के समर्थन में जुटे प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड बॉक्सिंग से मामले पर ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया कि महासंघ के भीतर उठे सवालों की निष्पक्ष समीक्षा हो और आवश्यक सुधार नियमों के तहत किए जाएं।
प्रमोद कुमार ने 28 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक के लिए इन संस्थाओं को पर्यवेक्षक भेजने का निमंत्रण देने की बात भी कही है। उनके अनुसार, वर्ल्ड बॉक्सिंग ने बैठक पर नजर रखने की बात कही है, हालांकि समय की कमी के कारण पर्यवेक्षक भेज पाना संभव नहीं बताया।
भारतीय बॉक्सिंग महासंघ में नेतृत्व को लेकर जारी यह टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। 28 अक्टूबर की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव और उसकी वैधता को लेकर क्या स्थिति बनती है, इस पर खेल जगत की नजर रहेगी। इस बीच सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि संगठनात्मक विवाद का असर खिलाड़ियों की तैयारी, प्रतियोगिताओं और भारतीय मुक्केबाजी के भविष्य पर न पड़े।



