SIR विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हलफनामे के जवाब के लिए याचिकाकर्ताओं को 10 दिन का समय दिया

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाबी हलफनामे पर अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर को होगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना शामिल हैं। पीठ के समक्ष चुनाव आयोग के कामकाज में निर्णय लेने की प्रक्रिया और SIR से संबंधित विभिन्न फैसलों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।

आयोग ने एकतरफा फैसलों के आरोपों को नकारा

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपने विस्तृत हलफनामे में उन आरोपों को खारिज किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों की राय को दरकिनार करते हुए SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले एकतरफा लिए। आयोग का कहना है कि संबंधित निर्णय तीनों सदस्यीय पूर्ण आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे।

आयोग ने SIR की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के पर्याप्त अवसर दिए गए थे तथा पात्र मतदाता को उचित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना सूची से बाहर नहीं किया जाएगा।

फॉर्म-6 को लेकर भी उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से संबंधित मुद्दा भी सामने आया। राज्यसभा सांसद डोला सेन की ओर से दायर एक नई याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 में बदलाव किए गए, जबकि इसके लिए अदालत की अनुमति नहीं ली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस भी जारी किया है।

फॉर्म-6 में ऑनलाइन घोषणा से जुड़े विवाद पर आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी वैधानिक फॉर्म में अनधिकृत संशोधन नहीं किया गया। रिपोर्टों के अनुसार आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन प्रस्तुति के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी और बाद में फॉर्म तथा घोषणा को अलग कर दिया गया।

राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिकाएं

इस मामले में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन से जुड़े नेताओं सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तर पर कथित एकतरफा निर्णय, SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कदमों की पारदर्शिता को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से सुनवाई के दौरान आयोग के आंतरिक संचार और फाइल नोटिंग सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई गई, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महत्वपूर्ण निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिए गए थे।

अब याचिकाकर्ताओं के जवाब पर टिकी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश के बाद याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे में उठाए गए बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन मिलेंगे। इसके बाद अदालत 17 नवंबर को मामले की आगे सुनवाई करेगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अगली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के जवाब और आयोग के पक्ष पर विचार के बाद मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।