
सबगुरु न्यूज-आबूरोड। आबूरोड का नया बोर्ड बनने के बाद भावना अग्रवाल के नेतृत्व में पहली बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में कांग्रेस के पार्षदों ने कई मुद्दे उठाए। लेकिन, ये नीरज डांगी गुट के थे।
ऐसे में संयम लोढा गुट के तीन पार्षद इनके विरोध में खडे रहे और उस सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी समर्थन करते नजर नहीं आए जिस तरह के आरोप पर संयम लोढा ने सिरोही के पूर्व सभापति ताराराम माली को बुरी तरह से घेर लिया था। ये मामला था सिरोही नगर पालिका की तरह आबूरोड नगर पालिका में भी एक संविदा कर्मी को नियुक्ति देने का।
कांग्रेस पार्षदों के द्वारा बोर्ड की बैठक में लहराए जा रहे प्ले कार्ड में एक प्लेकार्ड किसी परेश माली की नौकरी का भी था। कांग्रेस शुरू से ही आरोप लगा रही है कि एक अधिशासी अधिकारी के साथ मूव करने वाले पिंडवाडा के संविदाकर्मी को उसी अधिशासी अधिकारी के कार्यकाल में स्थाई नियुक्ति दे दी गई।
– सिरोही में दर्ज हुआ था निलम्बन
सिरोही नगर परिषद में भी ऐसा ही मामला हुआ था। 25 फरवरी 2015 को भाजपा के बोर्ड में ताराराम माली के सभापति काल में तत्कालीन आयुक्त लालसिंह राणावत ने पांच जनों को नियुक्ति पत्र जारी किए थे। इस नियुक्ति पत्र का आधार डीएलबी के 30 सितम्बर 2013 के उस आदेश को बनाया था जिसमें डीएलबी ने सिरोही नगर परिषद में पांच पद सृजित करने के आदेश दिए थे।
पद सृजन को ही नियुक्ति आदेश मानकर ताराराम माली की अध्यक्षता में 10 दिसम्बर 2014 को आयोजित साधारण सभा में पांच लोगों को नियुक्ति देने का प्रस्ताव ले दिया था। ये मामला सामने आया तो जांच हुई। सरकार बदलते ही ताराराम माली को इस प्रकरण समेत अन्य मामलों में निलम्बन का सामना करना पडा। धनपतसिंह राठौड कार्यवाहक सभापति बने।
– कांग्रेस ने भाजपा राज मे ंही करवा दी जांच
आबूरोड में कांग्रेस का विधायक है। कांग्रेस की नगर अध्यक्ष नगर परिषद मे ंपार्षद है। ये सभी उन्हीं संयम लोढा के गुट के हैं जिन्होंने सिरोही में विधायक पद पर नहीं रहते हुए भी भाजपा के शासन में भाजपा के सिरोही विधायक के सरकार में मंत्री रहते हुए भाजपा के ही सभापति के खिलाफ नियम विरूद्ध नियुक्ति देने के मामले में जांच करवा दी। इस मामले में वृहद् स्तर पर जांच करवा दी। उस मामले में एक अज्ञात शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मंे की गई थी और कांग्रेस के पार्षदों ने संयुक्त रूप से एक शिकायत लोकायुक्त को भी की थी।


