अकुशल ठेका कर्मियों से रेल संरक्षा पर खतरे की आशंका, अजमेर मंडल में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन

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अजमेर। रेलवे के ट्रैक्शन (टीआरडी) विभाग में ठेका कर्मचारियों से कराए जा रहे कार्यों और अधिकारियों के कथित कर्मचारी विरोधी रवैये को लेकर रेल कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लॉइज यूनियन के बैनर तले सोमवार को अजमेर सहित मंडल के कई रेलवे स्टेशनों और इकाइयों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अकुशल ठेका श्रमिकों से सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और निगरानी के बिना संवेदनशील कार्य कराए जा रहे हैं। इससे रेल संरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

यूनियन के अनुसार अजमेर, आबूरोड, उदयपुर, नसीराबाद, ब्यावर, रानी, मारवाड़, भीलवाड़ा और डूंगरपुर सहित विभिन्न स्थानों पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर रेलवे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने टीआरडी विभाग में कार्यप्रणाली सुधारने, कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने और प्रशासनिक आधार पर किए गए स्थानांतरण आदेश वापस लेने की मांग की।

अधिकारी के व्यवहार और स्थानांतरणों पर जताया विरोध

अजमेर स्टेशन पर आयोजित प्रदर्शन में मंडल सचिव मोहन चेलानी ने वरिष्ठ मंडल अभियंता (टीआरडी) पर कर्मचारियों को अपने कक्ष में बुलाकर अभद्र व्यवहार करने और गाली-गलौज करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि तकनीशियनों और पर्यवेक्षकों के प्रशासनिक आधार पर किए गए स्थानांतरणों को वापस लिया जाना चाहिए। यूनियन ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।

मंडल अध्यक्ष राजीव शर्मा ने 8 और 9 अक्टूबर को हुई फेलियर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं के लिए अकुशल ठेका कर्मचारियों से असुरक्षित तरीके से काम कराने की प्रशासनिक व्यवस्था भी जिम्मेदार है। उनका कहना था कि संवेदनशील तकनीकी कार्यों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की भूमिका और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है।

संवाद की कमी से बढ़ रहा असंतोष

राजीव शर्मा ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी फील्ड में जाकर कर्मचारियों की समस्याएं सुनने और तकनीकी कार्यों की वास्तविक स्थिति समझने के बजाय अनुशासनात्मक कार्रवाई के माध्यम से भय का वातावरण बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे जैसे संवेदनशील संस्थान में कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद, आपसी सहयोग और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव का असर कार्यक्षमता के साथ रेल संचालन की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

प्रदर्शन में विपुल सक्सेना, गौरव मेहरा, रमेश निमेडिया, अरविंद यादव, संजीव अरोड़ा, पप्पू सिंह रावत, संजय चतुर्वेदी, राजीव सेन, लक्ष्मी आनंद, प्रेमलता, कुशलेश और किरण सहित बड़ी संख्या में रेल कर्मचारी शामिल हुए।

यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की समस्याओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होने तक क्रमिक आंदोलन जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को मंडल स्तर पर और व्यापक किया जाएगा।