शिक्षकों की लंबित वित्तीय मांगों को लेकर ABRSM ने अतिरिक्त मुख्य सचिव से की वार्ता, शीघ्र समाधान का मिला आश्वासन

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चार माह के बकाया वेतन, कुक-कम-हेल्पर के मानदेय और शिक्षकों की वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग
33 हजार संविदा शिक्षकों को नियमित करने, स्थानांतरण और पे-प्रोटेक्शन का मुद्दा भी उठाया
जयपुर। राजस्थान में शिक्षकों एवं शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की लंबित वित्तीय और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने राज्य सरकार के समक्ष अपनी मांगें उठाई हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से सचिव स्तरीय वार्ता कर विभिन्न मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की।

संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने वार्ता में बताया कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) प्रदेश के करीब तीन लाख शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षक हितों के संरक्षण और विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान से शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

चार माह का बकाया वेतन दीपावली से पहले दिलाने की मांग

वार्ता के दौरान समग्र शिक्षा के अंतर्गत परिषद मुख्यालय, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने SNA-SPARSH खाते से पीडी खाते में राशि हस्तांतरित कर वेतन भुगतान की व्यवस्था के लिए वित्त विभाग से तत्काल स्वीकृति दिलाने की मांग की। साथ ही पिछले चार माह से लंबित वेतन का भुगतान दीपावली से पहले करवाने पर जोर दिया।

इसके अलावा सरकारी विद्यालयों में कार्यरत पोषाहार कुक-कम-हेल्पर के बकाया मानदेय, कन्वर्जन राशि तथा दूध और चीनी की राशि का तत्काल भुगतान कराने की मांग भी रखी गई।

स्टाफिंग पैटर्न और नियुक्ति तिथि से परिलाभ का मामला

संगठन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में स्टाफिंग पैटर्न के तहत पदों के निर्धारण एवं स्वीकृति से संबंधित वित्त विभाग में लंबित पत्रावली का अनुमोदन करवाने की मांग की। वहीं 31 दिसंबर के बाद नियुक्त शिक्षकों को न्यायालय के निर्णय के अनुरूप प्रथम नियुक्ति तिथि से ग्रीष्मावकाश सहित सभी देय परिलाभ देने का मुद्दा भी उठाया।

इसके साथ ही वेतन व्यवस्था के तहत कार्यरत शिक्षकों से शहरी मकान किराया भत्ते के नाम पर की जा रही वसूली रोकने, सेवारत शिक्षकों को बीएड के दौरान इंटर्नशिप अवधि का पूर्ण वेतन देने तथा इस संबंध में जारी वसूली आदेश वापस लेने की मांग की गई। संगठन ने शिक्षक कल्याण बोर्ड के गठन का प्रस्ताव भी राज्य सरकार को भेजने का आग्रह किया।

स्थानांतरण, वेतन विसंगति और संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण की मांग

प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि वार्ता में टीएसपी क्षेत्र में कार्यरत तृतीय एवं द्वितीय श्रेणी शिक्षकों को नॉन-टीएसपी क्षेत्र में समायोजित करने तथा नॉन-टीएसपी क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों को उनके गृह जिलों में स्थानांतरित करने की मांग रखी गई।

संगठन ने शिक्षकों से की जा रही विभिन्न प्रकार की वसूलियों पर रोक लगाने और पे-प्रोटेक्शन देने, तृतीय श्रेणी शिक्षकों एवं प्रबंधकों की वेतन विसंगतियां दूर करने तथा करीब 33 हजार संविदा शिक्षकों को प्रबोधकों की तर्ज पर नियमित करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग भी उठाई।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने दिया सकारात्मक आश्वासन

प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने वार्ता को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा ने संगठन की ओर से प्रस्तुत मांगों और सुझावों पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया तथा वित्तीय मांगों के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया। वार्ता में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, संगठन मंत्री उमराव लाल वर्मा और अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल उपस्थित रहे।