पूर्वी लद्दाख के न्योमा एयरबेस पर भारी परिवहन विमान की ऐतिहासिक लैंडिंग, एलएसी के पास भारत की सामरिक हवाई परिवहन क्षमता को मिलेगी मजबूती
नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना ने सामरिक और विमानन क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वायु सेना के विशालकाय सैन्य परिवहन विमान IL-76MD ‘गजराज’ ने पूर्वी लद्दाख में चीन सीमा के नजदीक स्थित न्योमा एयरबेस पर 13,629 फीट की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की है। भारतीय वायु सेना के अनुसार, यह दुनिया में इस श्रेणी के विमान की अब तक की सबसे ऊंचाई पर की गई लैंडिंग है।
वायु सेना ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे विमानन इतिहास में नया कीर्तिमान बताया। वायु सेना ने कहा कि यह सफलता विमान की परिचालन क्षमता के साथ उसके चालक दल के असाधारण कौशल, सटीकता और पेशेवर दक्षता का प्रमाण है। इससे भारत की सामरिक हवाई परिवहन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
एलएसी से महज 25 किलोमीटर दूर है न्योमा एयरबेस
पूर्वी लद्दाख में स्थित न्योमा एयरबेस सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। समुद्र तल से लगभग 13,629 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस एयरफील्ड पर भारी परिवहन विमान का उतरना भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण विस्तार माना जा रहा है। न्योमा एयरबेस को नवंबर 2025 में परिचालन के लिए तैयार किया गया था। इसके विकसित होने से पूर्वी लद्दाख में सेना और वायु सेना को रसद, सैन्य उपकरण तथा अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए एक अतिरिक्त महत्वपूर्ण हवाई ठिकाना मिला है।
पतली हवा में लैंडिंग करना बड़ी चुनौती
इतनी अधिक ऊंचाई पर भारी विमान का संचालन आसान नहीं होता। ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा का घनत्व कम हो जाता है। इससे विमान के पंखों को मिलने वाला लिफ्ट प्रभाव और इंजन का प्रदर्शन प्रभावित होता है। ऐसे वातावरण में विमान को नियंत्रित करना, निर्धारित गति बनाए रखना और सुरक्षित लैंडिंग करना पायलटों के लिए बड़ी चुनौती होती है। IL-76MD जैसे भारी परिवहन विमान की न्योमा में सफल लैंडिंग इस चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में वायु सेना की तकनीकी और मानवीय दक्षता को दर्शाती है।
क्या है IL-76MD ‘गजराज’ की खासियत
IL-76MD रूसी मूल का चार इंजन वाला भारी सैन्य परिवहन विमान है। भारतीय वायु सेना में इसे ‘गजराज’ के नाम से जाना जाता है। यह सैनिकों, सैन्य वाहनों, भारी हथियारों, उपकरणों और आवश्यक रसद को लंबी दूरी तक पहुंचाने में सक्षम है। इस विमान की वहन क्षमता विमान के विन्यास और परिचालन परिस्थितियों के अनुसार लगभग 40 से 45 टन तक होती है। इसका इस्तेमाल सैन्य अभियानों के साथ-साथ आपदा राहत और दूरदराज के क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए भी किया जाता है।
2020 के बाद पूर्वी लद्दाख में बढ़ी हवाई परिवहन की भूमिका
वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव के बाद इस क्षेत्र में हवाई परिवहन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई थी। उस दौरान भारतीय वायु सेना ने बड़ी संख्या में सैनिकों, टैंकों, बीएमपी वाहनों और अन्य सैन्य साजो-सामान को अग्रिम क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
न्योमा में IL-76MD की सफल लैंडिंग से अब भारी सैन्य सामग्री को चीन सीमा के नजदीक तक पहुंचाने की क्षमता में विस्तार होगा। यह उपलब्धि सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना की रसद व्यवस्था और रणनीतिक तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वायु सेना ने इस उपलब्धि को अपनी परिचालन क्षमता का नया अध्याय बताते हुए कहा कि सीमाओं को आगे बढ़ाने और नई ऊंचाइयों को हासिल करने का सिलसिला जारी रहेगा।



