अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ थाने में दर्ज साइबर ठगी के एक मामले में आरोपियों के नाम हटाने की एवज में चार लाख रुपए की रिश्वत मांगने वाले दलाल गफूर खान के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मामला दर्ज किया है।
इस मामले में तत्कालीन लक्ष्मणगढ़ थानाधिकारी नेकीराम और हेड कांस्टेबल विजय मीणा की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है। ब्यूरो ने बताया है कि सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने और सौदेबाजी से जुड़ी बातचीत के डिजिटल साक्ष्य उसके पास मौजूद हैं।
पुलिस अधीक्षक शब्बीर खान ने बुधवार को बताया कि मई में परिवादी मुनफैद खान ने शिकायत की थी कि लक्ष्मणगढ़ थाने में दर्ज साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीष कुमार के जरिए उसके भाई मुस्तकीम, बहनोई शाकिर और चचेरे भाई साजिद का नाम भी जोड़ दिया गया, जबकि उनका कहना है कि उनका ठगी से कोई संबंध नहीं था।
जब मुनफैद थाने पहुंचा तो हेड कांस्टेबल विजय मीणा से मिला जिसने थानाधिकारी नेकीराम से मिलवाया। नेकीराम ने उनका नाम हटाने की एवज में दलाल गफूर खान के जरिए पांच लाख रुपए की रिश्वत की मांग की। बाद में वह चार लाख रुपए में मान गया।
ब्यूरो ने रिश्वत मांगे जाने की बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली, लेकिन ब्यूरो के दल ने जब रंगे हाथों पकड़ने का प्रयास किया तो दलाल गफूर मौके पर पहुंचा। इसकी रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।



