बरेली। देश भर में चर्चा का विषय बने मतदाता गहन निरीक्षण (एसआईआर) ने एक परिवार को अपनों से मिलवा दिया।
दरअसल, 40 साल पहले घर से नाराज होकर निकले ओमप्रकाश दिल्ली में मुसलमान बन गए। अब जब दिल्ली में एसआईआर सर्वे हुआ तो वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं था, जिस वजह से वो अपने बरेली जिला शाही गांव वापिस आ गए। गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूल-मालाओं, बैंड-बाजे और जुलूस साथ उनका भव्य स्वागत किया।
बरेली शाही थाना क्षेत्र काशीपुर निवासी ओमप्रकाश आखिरकार अपने घर वापिस लौट आए। काशीपुर निवासी ओमप्रकाश पुत्र वेद राम मात्र 15 वर्ष की उम्र में घर से नाराज़ होकर चले गए थे। वर्षों बीतने के बाद उनके घर न लौटने पर गांव में उनकी मौत की चर्चाएं होने लगीं और परिवार ने भी यही मान लिया था कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। इस बीच उनके पिता का भी देहांत हो गया था। फिलहाल उनके आने से क्षेत्र में चर्चा बना हुआ है।
शुक्रवार को ओमप्रकाश अपनी बड़ी बहन चंद्रकली और अपने 15 वर्षीय बेटे जुम्मन के साथ काशीपुर पहुंचे। ग्रामीणों ने दोनों का पूरे गांव में घुमाकर स्वागत किया। ग्रामीण तब हैरान रह गए जब ओमप्रकाश ने बताया कि अब उनका नाम सलीम पुत्र ताहिर हुसैन निवासी उस्मानपुर, दिल्ली है। दरअसल दिल्ली में एसआईआर अभियान चल रहा है। फॉर्म भरने के दौरान माता-पिता की आईडी न मिलने पर उन्हें सच्चाई बताकर गांव लौटना पड़ा।
ओमप्रकाश ने बताया कि घर से निकलने के बाद वह कुछ समय बरेली में मजदूरी करते रहे, फिर दिल्ली चले गए। वहां कोई आईडी प्रूफ न होने पर मोहल्ले के लोगों ने उनका नया नाम और पता दर्ज कराकर वोटर आईडी बनवाई। इसी बीच उनका निकाह मोहल्ले की शाहबानो से हुआ, जिससे उनकी चार बेटियाँ-रुखसाना, रुखसार, रूपा, कुप्पा-और एक बेटा जुम्मन है। तीन बेटियां शादीशुदा हैं।
चालीस वर्षों बाद ओमप्रकाश को देखकर छोटा भाई रोशनलाल, भतीजा कुंवरसेन, वीरपाल, ग्राम प्रधान वीरेंद्र राजपूत सहित ग्रामीण भावुक हो उठे। ग्रामीणों ने उन्हें और जुम्मन को मंदिर ले जाकर स्नान करवा कर दोबारा से सनातन धर्म में घर वापसी करवाई। ओमप्रकाश को मालाएं पहनाईं और भोज का आयोजन किया। ओमप्रकाश उर्फ सलीम ने बताया कि अब वे परिवार संग अपने पुश्तैनी गांव काशीपुर में ही बसना चाहते हैं और सारी पहचान पत्र भी गांव से ही बनवाएंगे।



