रेवदर और पिण्डवाडा विधायकों के बाद अब सांसद भी नजरअंदाज!

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सिरोही में राजस्थान दिवस के सांस्कृतिक आयोजन का आमंत्रण पत्र जिससे सांसद और शेष दो विधायकों की तस्वीर नदारद होने की चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल है।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही भाजपा में जिले में अपना वर्चस्व कायम करने और सत्ता के लाभ में हिस्सेदारी के लिए आपसी खींचतान चरम पर है। मंडार के लीलाधारी महादेव पशु मेले में रेवदर के कांग्रेस विधायक के बाद पिण्डवाडा-आबू विधायक ने अधिकारियों के द्वारा अपने अपमान का आरोप लगाया था। इन आरोपों पर ओटाराम देवासी अधिकारियों के पक्ष में खडे हो गए थे।

अब नया विवाद राजस्थान दिवस के कार्यक्रम के कार्ड को लेकर है। सिरोही में 19 मार्च को करवाए जा रहे राजस्थान दिवस के कार्यक्रम के कार्ड में से सांसद के साथ-साथ रेवदर और पिण्डवाडा आबू विधायक की तस्वीरें फिर से नदारद हैं। जबकि ये कार्यक्रम जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और नगर परिषद सिरोही के द्वारा करवाया जा रहा है। सांसद तो नगर परिषद के आमंत्रित सदस्य भी होते हैं। सिरोही में सोशल मीडिया में अब इसकी चर्चाएं खुलकर हो रहीे हैं।

– एक दूसरे के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप की रार

संगठन में चर्चा है कि सिरोही भाजपा के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों में ये रार पार्टी हित को लेकर नहीं बल्कि व्यक्तिगत हितो ंको लेकर है। सगठन में अंदरखाने चर्चा ये है कि सांसद लुम्बाराम चैधरी, ओटाराम देवासी, समाराम गरासिया, रक्षा भंडारी के बीच खींचतान का मुख्य कारण जिले में अपने वर्चस्व को लेकर है।

अधिकारियों के स्थानांतरण, कामों में अपने करीबियों की पैरवी आदि के कारण ये मनमुटाव और बढता जा रहा है। ये चतुष्कोणीय मुकाबला तब षटकोणीय हो गया जब रक्षा भंडारी के जिलाध्यक्ष बनने के बाद लम्बे अर्से से हाशिए पर रहे नारायण पुरोहित को प्रदेश मंत्री और पायल परसरामपुरिया को प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है। अब तक ये दोनों दर्शक दीर्घा में थे। अब इनके समर्थक भी जोश में हैं।

-कभी स्थानांतरण तो कभी कार्ड के रूप में बाहर

पार्टी सूत्रों की मानें तो जिले में अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए समय समय पर इन नेताओं के गठबंधन बनते बिगडते रहे हैं। अपने हितों के अनुसार एक का साथ छोडकर दूसरे पर निशाना साधने का इशारा जिले में कार्मिकों की पोस्टिंग के रूप में सामने आता रहा है। सिरोही, आबू और पिण्डवाडा नगर पालिकाओं में पिछले एक महीने से चल रही उठापटक इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। वर्चस्व की लडाई में दूसरा प्रतीक बनाया है सरकारी आयोजनों के  कार्ड और होर्डिंग आदि में एक नेता की मौजूदगी और दूसरे की रूखसती को।