चेन्नई। तमिलनाडु के थेनी जिला जेल से तीन ड्यूटी वार्डनों पर हमला कर फरार हुए सभी 17 कैदियों को पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार को कारागार विभाग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि व्यापक तलाशी अभियान और ड्रोन निगरानी की मदद से फरार कैदियों को पकड़कर वापस जेल पहुंचा दिया गया। इस घटना के बाद राज्य की अन्य जेलों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
17 विशेष टीमों ने चलाया तलाशी अभियान
कारागार विभाग की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार रात करीब 10 बजे थेनी जिला जेल के तीसरे ब्लॉक में एक कैदी ने मिर्गी का दौरा पड़ने का नाटक किया। इसके बाद मौके पर पहुंचे सुरक्षाकर्मियों पर कैदियों ने कथित तौर पर हमला कर दिया और 17 कैदी फरार हो गए।
घटना की जानकारी मिलते ही फरार कैदियों की तलाश के लिए 17 विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। थेनी सशस्त्र रिजर्व पुलिस, विशेष पुलिस बल और जिला पुलिस के जवानों ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाया। जंगल और पहाड़ी इलाकों में ड्रोन के जरिए निगरानी की गई, जबकि आसपास के क्षेत्रों में भी पुलिस ने खोजबीन तेज कर दी।
पहले 13, फिर दो और आखिर में बाकी दो पकड़े गए
पुलिस ने मंगलवार को अभियान के दौरान 13 फरार कैदियों को पकड़ लिया था। बुधवार सुबह दो और कैदी गिरफ्तार किए गए। इसके बाद शेष दो कैदी भी पुलिस की गिरफ्त में आ गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम दो कैदियों की पहचान तिरुपति और मीनाक्षीसुंदरम के रूप में हुई, जिन्होंने कुडलूर पुलिस थाने में आत्मसमर्पण किया। इसके साथ ही सभी 17 कैदियों की तलाश पूरी हो गई।
राज्य की जेलों में सुरक्षा बढ़ाई गई
कारागार एवं सुधार सेवा महानिदेशक संदीप राय राठौर के निर्देश पर यह अभियान चलाया गया। थेनी जेल से कैदियों के फरार होने के साथ चेन्नई के निकट पुझल केंद्रीय जेल से दो कैदियों के भागने की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है।
इन घटनाओं के बाद तमिलनाडु की जेलों में निगरानी बढ़ाई गई है। संवेदनशील स्थानों पर सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और कैदियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वॉच टावर बनाए गए हैं। अधिकारियों का जोर भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने और जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर है।
पुलिस और कारागार विभाग की कार्रवाई के बाद फरार कैदियों से जुड़ा तलाशी अभियान समाप्त हो गया है। अब घटना के दौरान सुरक्षा में हुई चूक और कैदियों के भागने की परिस्थितियों की जांच पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।



