तो क्या फेल हुए भाई साहब के प्रयास!


सबगुरू न्यूज-सिरोही। तो जो भाई साहब सबको ये विश्वास देकर चुनाव प्रचार में झोंके थे कि जमकर मेहनत करो, भाजपा की सत्ता आई तो भाजपा की नहीं अपनी चलेगी, उन्हीं की रणनीति को राजनिति फेल करने में लगी है।

बडे रूसवा होकर वो राजनीति के कूचे से निकले, बहुत निकले भाई साहब अरमान लेकिन, फिर भी कम निकले। सिरोही के जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश कुमार के स्थानांतरण को लेकर भाई साहब के साथ कुछ ऐसी ही गुजरी है। वैसे अभी इसमें कुछ तकनीकी पहलू भी आ रहे हैं। अब कानूनी रुप से तकनीकी पहलू किसके पक्ष में बैठता है ये देखने का विषय है।

– ‘ भाई साहब’ को ही बना दिया चकरघिन्नी
तो ‘ भाई साहब’ चिकित्सा विभाग में काम करते हैं। ऐसे में चिकित्सा विभाग के आला अधिकारी के स्थानांतरण में उनकी विशेष रूचि थी। सत्ता बदलते ही भाई साहब ने महाविद्यालय के नेताओ के अपने शागिर्दों से सीएमएचओ राजेश कुमार का स्थानांतरण नहीं होने को लेकर नेता जी के प्रति असंतोष भी जतवाया था। जब कांग्रेस की सत्ता थी तो इन्हीं शागिर्दों ने सीएमएचओ के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

भाई साहब जिन नेताजी का निर्वाचन इस डींग के साथ करवाने का जोश भर रहे थे कि अपनी ही चलेगी, नेताजी ने उन्हें ही चकरघिन्नी बना दिया। अब भाई साहब के काटो तो खून नहीं वाली स्थिति बनी हुई हैं। नेताजी ने ‘ पहले वाला नहीं रहा’ के बयान का इस्तेमाल भाई साहब पर ही कर दिया। भाई साहब के अरमान अपने ही दिए आशीर्वाद से भस्म हो गए।
-ले आए स्टे
सीएमएचओ राजेश कुमार के स्थानांतरण को लेकर सत्ता परिवर्तन होते ही दबाव बनने लगा था। भाजपा के जनप्रतिनिधि प्रधानमंत्री की उस नसीहत से डरे हुए थे जिसमें उन्होंने सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग के चक्कर में नहीं पडने की हिदायत दी थी। ऐसे में जनप्रतिनिधि भी समझौतावादी मुद्रा में आ चुके थे। पूर्ववर्ती सरकार के समय लगे अधिकारियों के स्थानान्तरण की बजाय समझौते की मुद्रा में आ गए।

सूत्रों की मानें तो नेताजी और सीएमएचओ में भू मुद्दों पर आम सहमति बन गई। अब भाई साहब ये मुगालता पाले हुए थे कि नेताजी का निर्वाचन उनकी मेहरबानी से हुआ है तो नेताजी को भी अपना कर्ज उतारने का दिखावा करना था। सीएमएचओ राजेश कुमार का स्थानांतरण करवाकर भाई साहब अपनी पसंद का सीएमएचओ भी ले आए। अब बारी थी भाई साहब को उनकी जगह दिखाने की। तो सीएमएचओ राजेश कुमार न्यायालय से स्टे लाकर फिर से यहां पर चार्ज संभाल लिए। भाई साहब के सुंदर सपने खो गए। ऐसे में नेताजी ने सांप भी मार दिया और लाठी भी नहीं टूटी।

लेकिन इसमें एक तकनीकी पहलू भी है। वो ये कि भाई साहब के द्वारा कथित रूप से अपने जिन करीबी व्यक्ति को यहां सीएमएचओ लाने की बाt चल रही है उन्होने पहले ही यहां ज्वाइन कर लिया था। वहीं राजेश कुमार ने भी स्वयं कार्यभार संभालने का आदेश जारी कर दिया। अब कानूनी रुप से तकनीकी पहलू किसके पक्ष में बैठता है ये देखने का विषय है।